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अफवाह: मोदी ने मुस्लिमों के बच्चों को खत्म करने वाली सुई भेजी है

Patrika news network Posted: 2017-03-16 17:37:06 IST Updated: 2017-03-16 17:37:06 IST
अफवाह: मोदी ने मुस्लिमों के बच्चों को खत्म करने वाली सुई भेजी है
  • राजस्थान के मुस्लिम बहुल मेवात इलाके में एक खतरनाक अफवाह फैलाई गई। सरकारी स्कूलों में टीकाकरण चल रहा था,बच्चों को न्यूट्रीशन की दवाईयां दी जा रही थी।

जयपुर।

राजस्थान के मुस्लिम बहुल मेवात इलाके में एक खतरनाक अफवाह फैलाई गई। सरकारी स्कूलों में टीकाकरण चल रहा था,बच्चों को न्यूट्रीशन की दवाईयां दी जा रही थी। अफवाह उड़ा दी गई कि ये सुईयां मोदी ने भिजवाई है,जिसका मकसद मुस्लिम लड़के लड़कियों के संतान पैदान करने की क्षमता को खत्म कर देना है।

इसी डर से मेवात इलाके के स्कूलों में से बहुच से बच्चे पढऩे नहीं आ रहे। स्कूलों में सन्नाटा पसरा है। जो बच्चे आते हैं उनके चेहरे पर दहशत नजर आती है। दहशत का आलम यह है कि जब न्यूज चैनल वाले एक स्कूल में अफवाह की सच्चाई जानने पहुंचे तो स्कूल में भगदड़ मच गई। शोर मचा कि बांझ करने वाले सुई लगाने आए हैं। क्लास में बैठे बच्चे स्कूल की बाउंड्रीवाल से कूद कर भागने लगे। अलवर जिले के डिप्टी सीएमओ डॉ छबील कुमार ने कहा,हमने बीमारियों से छुटकारे के लिए टीकाकरण का अभियान चला रखा है लेकिन इलाके में अफवाह फैल गई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुस्लिम इलाके में बच्चे बच्चियों को नि:संतान करने की सुई भेजी है। इस वजह से पूरा टीकाकरण अभियान ही इन इलाकों में फेल हो गया है।

बताया गया कि इलाके में व्हाट्सएप पर एक फेक वीडियो तैर रहा है,जिसमें मुस्लिमों की पैदाइश दर को कम करने के तरीके बताए जा रहे हैं। इसी को किसी ने बढ़ा चढ़ाकर स्कूलों में चल रहे टीकाकरण से जोड़ दिया। लोगों को लगने लगा कि ये इंजेक्शन मुस्लिमों की नसबंदी करने के लिए हैं। बाड़ी पोखर गांव के आजाद खान ने कहा,सभी को गांव में सरकारी टीका लगाए जाने का डर सता रहा है। उन्हें लगता है कि मेव बिरादरी के लड़के लड़कियों को नि:संतान बनाने का टीका लगाया जा रहा है। इसे लोग मोदी सुई कह रहे हैं।

8 वीं क्लास के मुस्तफी और सपीना कहती है कि घर वालों ने कहा है कि कोई स्कूल में आए तो घर आ जाना। मोदी का टीका लग रहा है जिससे जिंदगी में कभी बच्चे पैदा नहीं होंगे। मेवात में कई सालों से मुस्लिमों के बीच पढ़ाई लिखाई के लिए 317 गांवों में जागरुकता फैला रहे सामाजिक कार्यकर्ता नूर मोहम्मद इस बात से बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि इतने सालों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 10 से 20 फीसदी ही रह गई है। चंद लोग अपने फायदे के लिए फेक वीडियो और संदेश का गलत इस्तेमाल करते हैं लेकिन बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर किसी का भला नहीं होने वाला है।