वायरल हुआ मैसेज, मुस्लिमों को दिया जा रहा है नपुंसक बनाने का इंजेक्शन

Daily news network Posted: 2017-02-15 16:33:45 IST Updated: 2017-02-15 16:33:45 IST
वायरल हुआ मैसेज, मुस्लिमों को दिया जा रहा है नपुंसक बनाने का इंजेक्शन
  • सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया गया है कि भारत के मुस्लिमों को नपुंसक बनाने के लिए एक इंजेक्शन तैयार किया गया है

नई दिल्ली।

सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया गया है कि भारत के मुस्लिमों को नपुंसक बनाने के लिए एक इंजेक्शन तैयार किया गया है। ये इंजेक्शन बीमारी से बचाने के बहाने स्कूलों में मुस्लिम बच्चों को लगाया जा रहा है।

मैसेज में किया जा रहा है ये दावा

प्यारे भाईयों और बहनों,अस्लामआलेकुम

भारत के सभी स्कूलों में बच्चों को इंजेक्शन देने का फैसला किया गया है,इसलिए भाईयों अपने बच्चों को इंजेक्शन मत लगने दीजिएगा। इस पर आपत्ति दर्ज कीजिएगा। ये आरएसएस यानि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की योजना है। जब आपके बच्चे 40 के आसपास हो जाएंगे तो वो अपने बच्चे नहीं कर पाएंगे। केरल के एक टीचर ने बताया है कि ये इंजेक्शन सिर्फ मुस्लिम बच्चों को ही देना है। तो अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए ये इंजेक्शन उन्हें मत लगने दीजिए। मैसेज में दवा के नाम के साथ ये भी बताया गया है कि किस बीमारी के इलाज के नाम पर स्कूलों में बच्चों को दिया जा रहा है।

एमआरवैक स्मॉलपॉक्स के इलाज के लिए खोजा गया नया इंजेक्शन है लेकिन ये सच नहीं है। इस दवा पर बहुत सारे देशों में प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन दवा बनाने वाली कंपनी मोदी सरकार के जरिए इसे देशभर के स्कूली बच्चों के लिए भेज रही है। मैसेज में अपील की गई है कि अपने बच्चों को सिखाएं कि किसी भी कीमत पर वो ये इंजेक्शन ना लगवाएं। ये एक धीमा जहर है जो ना सिर्फ बच्चों के भविष्य पर असर डालेगा बल्कि आने वाली नस्लों पर भी अपना असर दिखाएगा।

पड़ताल में वायरल मैसेज में किए गए दावे झूठे साबित हुए। एबीपी न्यूज चैनल ने इस संबंध में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ कानव आनंद से बात की। आनंद के मुताबिक वैक्सीन एमआर वैक मिजल और रुबेला बीमारी(खसरा और खसरा से संबंधित बीमारी)के लिए दी जाती है। स्मॉल पॉक्स से इसका कोई लेना देना नहीं है क्योंकि स्मॉल पॉक्स अलग बीमारी है। ये वैक्सीन रूटीन में बच्चों को दी जाती है। वैक्सीन 9 महीने से लेकर 15 माह की उम्र के बच्चों को दी जाती है जिससे उनमें बीमारी से लडऩे की क्षमता विकसित हो सके। डॉ कानव ने साफ किया है कि आमआरवैक नाम की वैक्सीन का स्मॉलपॉक्स जैसी बीमारी से कोई लेना देना नहीं है। साथ ही ये बताया कि दुनिया भर में इस दवा पर बैन नहीं लगा है। यानि मैसेज में किए गए दो दावे झूठे साबित हुए।

एबीपी न्यूज के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने 5 फरवरी को एमआरवैक वैक्सीन कैंपेन लॉन्च किया था। ये कैंपेन पांच क्षेत्रों में चल रहा है। इनमें कर्नाटक,तमिलनाडु,गोवा,लक्षद्वीप और पुड्डुचेरी शामिल है। इन पांच राज्यों में 3.6 करोड़ बच्चों को वैक्सीन दी जाएगी। 5 दिन के भीतर यानि 10 फरवरी तक 54 लाख बच्चों को वैक्सीन दी जा चुकी है। पूरे देश में करीब 41 करोड़ बच्चों को वैक्सीन देने की योजना है। ये दवा 40 साल से प्रयोग में है और पूरी तरह सुरक्षित भी। गौरतलब है कि इससे पहले पोलियो के टीके को लेकर भी मुस्लिमों के बीच अफवाह फैलाई गई थी। इस कारण मुस्लिम परिवार अपने बच्चों को पोलियो का टीका नहीं लगवाते थे।