आखिर पिता क्यों कर रहे हैं अपने जन्मे शिशु की हत्या, सच हैरान कर देगा

Daily news network Posted: 2017-10-26 15:48:59 IST Updated: 2017-10-26 15:48:59 IST
आखिर पिता क्यों कर रहे हैं अपने जन्मे शिशु की हत्या, सच हैरान कर देगा
  • मनुष्य हो या जानवर हर किसी के लिए उसकी संतान बेहद ख़ास होती है वो चाहकर भी उन्हें तकलीफ नहीं पहुंचा सकते तो फिर ऐसा क्या हुआ जो पिता को अपने ही जन्मे शिशु को मारना पड़ रहा है.

मेघालय

मनुष्य हो या जानवर हर किसी के लिए उसकी संतान बेहद ख़ास होती है वो चाहकर भी उन्हें तकलीफ नहीं पहुंचा सकते तो फिर ऐसा क्या हुआ जो पिता को अपने ही जन्मे शिशु को मारना पड़ रहा है. जी हां हम बात कर रहे हैं मेघालय की गॉरो हिल्स में हूलॉक गिब्बन की जो अपनी ममता का गला घोंट रहे हैं।

यहां के वनमानुष अपने नए मेहमान के जन्म लेते ही उसे जमीन पर पटक कर मार रहे हैं.  परिवार से प्यार करने वाले वन मानुषों के व्यवहार में आया यह हैरतंगेज बदलाव यूं ही नहीं है। साल दर साल अस्तित्व की लड़ाई हार रहे वन मानुषों की संख्या पिछले 25 वर्ष में 90 फीसद कम हो गई है। स्वेच्छाचारी मानुष के आगे वन मानुष विवश है। सिमटते जंगल और घटते भोजन पर इनकी नई पीढ़ी कैसे जिंदा रहेगी। वन मानुषों ने इस सवाल का यह निर्मम हल ढूंढ निकाला है।


व्यवहार में आए इस परिवर्तन का असर उनकी प्रजनन दर पर भी पड़ा है। देहरादून स्थित प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (जेडएसआइ) विभाग की टीम के हूलॉक गिब्बन पर किए गए शोध में यह हैरत में डालने वाला खुलासा हुआ।प्राणी विज्ञानी डॉ. जगदीश प्रसाद सती बताते हैं कि मेघालय के जंगलों में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष से साफ है कि तेजी से कट रहे जंगलों से वन मानुषों का रहन-सहन भी प्रभावित हुआ है।


डॉ. सती बताते हैं कि हूलॉक गिब्बन की प्रजनन की रफ्तार घटने से उनके अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां तक कि वे अपने बच्चों के कातिल बन बैठे हैं। जन्म लेते ही नर नवजात की पटक कर हत्या कर देता है। वर्ष 1990-1991 में सती ने पहली बार अपनी आंखों के सामने इस निर्मम दृश्य को देखा और इसे कैमरे में भी कैद किया।


शिशु के जन्म लेते ही पिता ने उसे मां की गोद से छीना और जमीन पर पटक कर मार दिया। वर्ष 2012 तक डॉ. सती ने हूलॉक गिब्बन के आचार-व्यवहार पर बारीकी से काम किया और आदिवासियों से भी इनके व्यवहार में आए विपरीत बदलाव की खबरें सुनीं।


उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि घटते जंगल और भोजन के संकट को देखते हुए ही हूलॉक अपनी भावी पीढ़ी को विकट संसार के हवाले करने को तैयार नहीं। इन वन मानुषों की यह दशा पर्यावरणीय चुनौती की ओर इशारा कर रही है। समय रहते सचेत हो जाने की आवश्यक्ता है।


आपको बता दें कि हूलॉक गिब्बन वन मानुषों की एक प्रजाति है। ये परिवार में और अपने प्राकृतिक वास में रहते हैं। गिब्बन का प्राकृतिक वास त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल, असम के अलावा बांग्लादेश, म्यांमार व चीन के कुछ भागों तक फैला है। मादा गिब्बन का रंग भूरा, नर का रंग काला व बच्चे का रंग दूधिया होता है। मानव में 46 गुणसूत्र होते हैं, जबकि वन मानुषों में इनकी संख्या 44, 52, 38 व 50 होती है। इनकी औसत उम्र 30 साल