ये है नागालैंड का सबसे खूंखार सिर काटने वाला कबीला

Daily news network Posted: 2017-05-20 11:01:57 IST Updated: 2017-05-20 11:01:57 IST
ये है नागालैंड का सबसे खूंखार सिर काटने वाला कबीला
  • खास बात यह है कि लोंगवा गांव में भारत का सबसे खूंखार कोंयाक आदिवासियों का कबीला रहता है

नई दिल्ली।

म्यांमार सीमा से लगता भारत का सबसे आखिरी गांव है लोंगवा। ये गांव घने जंगलों में बसा हुआ है। खास बात यह है कि इस गांव में भारत का सबसे खूंखार कोंयाक आदिवासियों का कबीला रहता है। ये कबीला अपने दुश्मनों के सिर धड़ से अलग करने के लिए जाना जाता है। हत्या या दुश्मन का सिर धड़ से अलग करने को यादगार घटना माना जाता था और इस कामयाबी का जश्न चेहरे पर टैटू बनाकर मनाया जाता था। हालांकि 1940 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नागालैंड में सिर काटने की आखिरी घटना 1969 में हुई थी।


ये कबीला अपने दुश्मन का सिर काटने के बाद उनकी खोपडिय़ों का प्रमुखता से प्रदर्शन करता था, लेकिन सिर काटे जाने पर रोक लगाने के बाद इन खोपडिय़ों को गांव से हटा दिया गया। वहीं कई खोपडिय़ों को जमीन में दफन कर दिया गया। बता दें कि लोंगवा का अस्तित्व 1970 में भारत और म्यांमार सीमा रेखा खींचे जाने से बहुत पहले से है। इस कबीले को दो हिस्सों में कैसे बांटा जाए, इस सवाल का जवाब नहीं सूझने पर अधिकारियों ने तय किया कि सीमा रेखा गांव के बीचों-बीच से जाएगी, लेकिन कोंयाक पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। बॉर्डर के पिलर पर एक तरफ बर्मीज में और दूसरी तरफ हिंदी में संदेश लिखा गया है। सीमा रेखा से गांव के मुखिया के घर को भी दो हिस्सों में काटती है, यहा मजाक में कहा जाता है कि गांव के मुखिया रात का भोजन भारत में करते हैं और सोते म्यांमार में हैं।


कोंयाक अब भी मुखिया शासन के अधीन आते हैं, जिन्हें अंग कहा जाता है। इस मुखिया के अधीन कई गांव आ सकते हैं। अंगों के बीच बहुविवाह की प्रथा प्रचलित है और इन मुखियाओं के कई पत्नियों से कई बच्चे हैं। 9वीं सदी के अंत में ईसाई मिशनरियों के यहां पहुंचने तक कोंयाक जीववादी, प्रकृति के तत्वों की पूजा करने वाले थे। बीसवीं सदी के अंत तक राज्य का 90 फीसदी से अधिक आबादी ने ईसाई धर्म को स्वीकार कर लिया था। आज नगालैंड के हर गांव में कम से कम एक चर्च है।



बता दें कि भैंस, हिरण, सुअर और पूर्वोत्तर में पाए जाने वाली गोजातीय प्रजाति मिथुन की हड्डियों को कोंयाक कबीले के हर घर की दीवार पर सजा हुआ देखा जा सकता है। कोंयाक झोपडिय़ां मुख्य रूप से बांस की बनी होती हैं। ये काफी विशाल होती हैं और इनमें कई हिस्से होते हैं, जैसे रसोई, खाना खाने, सोने और भंडारण। आधुनिक सभ्यता से लोंगवा अब भी काफ़ी दूर है, लकड़ी के घर और छप्पर एक खूबसूरत संग्रह हैं, लेकिन कहीं-कहीं टिन की छतों और कंक्रीट का निर्माण बदलाव की कहानी का संकेत दे रहे हैं।