225 दिन तक लिफ्ट लेकर नॉर्थ ईस्ट सहित पूरा देश घूमा ये शख्स

Daily news network Posted: 2017-10-17 20:49:12 IST Updated: 2017-10-17 20:49:12 IST
225 दिन तक लिफ्ट लेकर नॉर्थ ईस्ट सहित पूरा देश घूमा ये शख्स
  • हमहमेशा पैसे को महत्व देते हैं। सर्वाइवल के लिए पैसा जरूरी है, पर एक बात है कि पैसा हर समय और हर जगह काम नहीं आता। आप दिन में एक सौ रुपए कमाते हों या फिर एक लाख रुपए। शाम को इन्हें खर्च करते वक्त चेहरे पर शिकन नहीं, खुशी होनी चाहिए।

नई दिल्ली।

हमहमेशा पैसे को महत्व देते हैं। सर्वाइवल के लिए पैसा जरूरी है, पर एक बात है कि पैसा हर समय और हर जगह काम नहीं आता। आप दिन में एक सौ रुपए कमाते हों या फिर एक लाख रुपए। शाम को इन्हें खर्च करते वक्त चेहरे पर शिकन नहीं, खुशी होनी चाहिए। 

देशवासियों को यही समझाने के लिए मैं 225 दिनों से बिना पैसे के भारत भ्रमण कर रहा हूं। इस भ्रमण के दौरान मैं अच्छे से समझ गया हूं कि भारत के लोग कितने खुले दिल वाले हैं कि वे अपने-अतिथि देवो भव के मौलिक सिद्धांत पर खरे उतरते हैं। यह कहना है चंडीगढ़ पहुंचे इलाहाबाद के 27 वर्षीय अंश मिश्रा का। वे कैंपस प्लेसमेंट्स का काम करते हैं। वे इस साल 3 फरवरी से अपने घर इलाहाबाद से निकल कर दिल्ली, राजस्थान, गोवा, कन्याकुमारी और नॉर्थ ईस्ट से होते हुए चंडीगढ़ पहुंचे। 

अंश अब तक 24 राज्य, 4 यूटी और 3 इंटरनेशनल बॉर्डर्स को छू चुके हैं। अब वे हिमाचल से होते हुए लेह-लद्दाख और पंजाब होकर दिवाली तक वापस इलाहाबाद पहुंचना है। खास बात यह है कि वे जीरो बजट ऑल इंडिया टूर बिना पैसे के सफर, खाना और रहना कर रहे हैं। वह हीच-हाइकिंग यानी लिफ्ट के जरिए ही एक से दूसरी जगह पहुंचते हैं।

अंश ने बताया कि पिछले साल नवंबर में वह अपने चार दोस्तों के साथ अमृतसर से वापस लौटते हुए एक ढाबे पर खाना खा रहे थे। उनके टेबल के साथ ट्रक ड्राइवर और उसका खलासी, और वहीं उसके साथ दिखने में सभ्य परिवार के सदस्य भी बैठे थे। कुछ देर बाद उसी सभ्य परिवार के व्यक्ति को चिल्लाते हुए देखा।

दरअसल, उसकी एसयूवी ट्रक के पीछे खड़ी थी। अपनी गाड़ी को निकालने के लिए खुद की गलती से ट्रक में गाड़ी लगा दी और बाद में गालियां भी ट्रक वाले को निकालने लगा। जबकि ट्रक वाला इसे सुनकर बिलकुल चुप खड़ा था। वे बोले- हमारे देश में जॉब प्रोफाइल को देखते हुए ही लोग इज्जत करते हैं। जबकि सच यह है कि ट्रक ड्राइवर स्ट्राइक पर चले जाएं तो 20 रुपए किलो वाली सब्जी 100 रुपए किलो हो जाती है। 

रोजमर्रा में इस्तेमाल होनी वाली चीजें ट्रक ड्राइवर ही हमारे पास पहुंचाते हैं। इसलिए हमें उन्हें पूरी इज्जत देनी चाहिए। इसलिए मेरी यह यात्रा ट्रक ड्राइवर्स को समर्पित है। वे बोले- अपनी यात्रा के दौरान मैंने 1800 ट्रक ड्राइवर्स से लिफ्ट ली, उनके साथ खाया, उनके साथ सोया।

धैर्य जरूरी है|अंश नेबताया कि ऐसी यात्रा के लिए धैर्य जरूरी है। क्योंकि यह जरूरी नहीं कि आपको लिफ्ट देने के लिए लोग आसानी से तैयार हो जाए और खाना ऑफर करें। हालांकि इस सफर में मैंने बैलगाड़ी से लेकर मर्सिडीज तक से लिफ्ट ली। पर लोगों को समझाने में वक्त लगता था। 100 में से 10 ही लिफ्ट के लिए तैयार होते थे। इसलिए कई बार क्विट करने का सोचा पर हिम्मत बांधी। वे बोले- यात्रा के शुरुआती दौर में 9 घंटे तक लिफ्ट नहीं मिली। किसी ने ढाई दिन तक खाना ऑफर नहीं किया। 

कभी भाषा आढ़े आई तो मैं गूगल से स्थानीय भाषा सीखता। कभी इशारों में समझाता तो कभी मोबाइल पर फोटो दिखाकर। एक बार पुणे में चिकन पॉक्स हो गया तो पुणे में मुझे एक युवा ने 10 दिन तक अपने घर रखा। केरल में मुझे पुलिस ने अपराधी समझकर 45 मिनट के लिए हिरासत में ले लिया, पर सच्चाई जाने के बाद मुझे फल भी खिलाए और लिफ्ट भी दी।

इस तरह ऐसे तमाम अनुभव हैं। खासबात यह है कि एफबी अकाउंट पर ढाई हजार दोस्त और बन गए। सभी के कॉन्टेक्ट और सेल्फी मेरे पास हैं। पूरी यात्रा पर मैं डॉक्युमेंट्री बना रहा हूं। यात्रा पूरी होने पर एक किताब भी लिखूंगा। लेट्स रोम नाम से एफबी पर मेरा ऑफिशियल पेज है।