मिलिए मणिपुर की गीता से, जो अपने हुनर से बढ़ा रही हैं राज्य का नाम

Daily news network Posted: 2018-02-12 13:50:15 IST Updated: 2018-02-12 13:50:15 IST
मिलिए मणिपुर की गीता से, जो अपने हुनर से बढ़ा रही हैं राज्य का नाम
  • बता दें कि गीता इस काम में गैर सरकारी संगठन के साथ जुड़ी हुई हैं जो पारंपरिक और व्यवहारिक रेशम उत्पादन और प्रचार पर केंद्रित है।

मणिपुर अपने शिल्पकला के लिए देश में एक खास पहचान रखता है। यहां

के हस्तशिल्प को लोग काफी पसंद करते हैं। वहीं अपने हुनर से हस्तशिल्प के

क्षेत्र में श्रीमयुम गीता भी मणिपुर का मान बढ़ा रही हैं। 



गीता अपने हुनर से गहनों पर सिल्क कोकून से क्राफटिंग का काम कर रही हैं। जिससे गहनों की खूबसूरती कई गुणा बढ़ जाती है। 



खुराई

थोंगम लीकाई की रहने वाली गीता नए प्रयोग करती रहती हैं। वो अपने नए-नए

आईडियाज से यूनिक शिल्पकार के तौर पर उभर रही हैं। वह तरह-तरह के जूलरी

बनाती हैं। जिसमें ईयर रिंग, गले का हार, अंगूठियां इत्यादि शामिल हैं।



गीता

ने 3000 रुपए से अपने हस्तशिल्प व्यवसाय की शुरूआत की थी। अब उनका व्यवसाय

10 लाख का हो गया है और लगभग 40 कारीगर अभी उनके यहां काम कर रहे हैं। अब

तक उसने 80 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित भी किया है। जिसमे महिलाओं

की संख्या ज्यादा रही।



मणिपुर

में शहतूत के पत्तों का उपयोग कर रेशम उत्पादन करने की प्रथा सदियों

पुरानी है। शुरुआती समय से मणिपुरी महिलाएं कई तरह के धातुओं जैसे बेल

मेटल, तांबा और चांदी से गहने बनाते आ रही हैं। बता दें कि नयिन, मणिपुरी

महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला इयररिंग है जो आमतौर पर तांबे या सोने से

बना होता है।



गीता

गहने बनाने के लिए लीममेटिल सिल्क कोकून का प्रयोग करती हैं। गौर हो कि

गीता साल 2007 में मणिपुर के 20 महिलाओं के साथ मैसूर में केंद्रीय रेशम

उत्पादन अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र में पांच दिनों का प्रशिक्षण लिया

था। यहां इन्हें सिखाया गया कि कैसे कोकून आधारित गहने और मालाएं बनाए जाते

हैं। प्रशिक्षण के बाद गीता इस उद्योग की शुरूआत करने के लिए अत्यधिक

प्रेरित हुई।



बता दें कि गीता इस काम में गैर सरकारी संगठन के साथ जुड़ी हुई हैं जो पारंपरिक और व्यवहारिक रेशम उत्पादन और प्रचार पर केंद्रित है।



गीता

को अपने हुनर के लिए मणिपुर सरकार के द्वारा उत्कृष्ट शिल्पकार के रूप में

चयन कर उन्हें 2013 में आयोजित प्रतियोगिता में प्रेरणात्मक पुरस्कार से

सम्मानित किया गया था। हाल ही में उन्हें मणिपुर सरकार ने शिल्प में अपने

काम के लिए राज्य के शिल्पकार पुरस्कार से भी सम्मानित किया है।