सरकार का ऑफर ठुकराकर शहीद की पत्नी ने ज्वाइन की सेना, मुठभेड़ में शहीद हुए थे मेजर

Daily news network Posted: 2017-03-08 11:33:34 IST Updated: 2017-03-08 11:33:34 IST
सरकार का ऑफर ठुकराकर शहीद की पत्नी ने ज्वाइन की सेना, मुठभेड़ में शहीद हुए थे मेजर
  • शहीद पति के पदचिह्नों पर चलते हुए हाल ही एक मेजर की पत्नी ने आर्मी जॉइन की है। अब वह पति की ही तरह हर पल सिर्फ अपने देश के लिए जीना चाहती हैं। इसके लिए दिन-रात चेन्नई में आर्मी की कठिन ट्रेनिंग ले रहीं हैं। साथ ही अपने चार साल के बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।

चंडीगढ़।

शहीद पति के पदचिह्नों पर चलते हुए हाल ही एक मेजर की पत्नी ने आर्मी जॉइन की है। अब वह पति की ही तरह हर पल सिर्फ अपने देश के लिए जीना चाहती हैं। इसके लिए दिन-रात चेन्नई में आर्मी की कठिन ट्रेनिंग ले रहीं हैं। साथ ही अपने चार साल के बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। मजबूत इरादों वाली यह महिला हैं शहीद मेजर अमित देशवाल की पत्नी नीता देशवाल।

ज्ञात हो कि पिछले साल मणिपुर में अलगाववादियों के खिलाफ चले सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई मुठभेड़ में मेजर देशवाल शहीद हो गए थे। जिसके बाद अपने तीन साल के बेटे की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारी नीता के कंधों पर आ गई थी। मजबूत इरादों वाली नीता ने अपने मम्मी-पापा और सास-ससुर से कहा कि वह आर्मी जॉइन करना चाहती हैं। 

पति की मृत्यु के मात्र दो महीने बाद ही नीता ने सर्विस सलेक्शन बोर्ड के लिए तैयारी शुरू कर दी। हाल ही नीता ने शॉर्ट सर्विस कमिशन एग्जाम क्लियर किया है। इस बारे में नीता कहती हैं कि मेरे पति मेरे हीरो थे। उनके लिए आर्मी सबकुछ थी। आर्मी के साथ जुड़कर मुझे हर पल अपने पति के साथ होने का अहसास होगा। मैं आर्मी से दूर होने के बारे में सोच भी नहीं सकती। मेरे पति एक जिम्मेदारी भरे पद पर थे। मैं भी एक ऑफिसर बनकर उनकी तरह देश की सेवा करना चाहती हूं और उनके सम्मान को बढ़ाना चाहती हूं।

हरियाणा के झज्जर जिले की हैं नीता

नीता मूलरूप से हरियाणा के झज्जर जिले की रहने वाली हैं। मेजर देशवाल के शहीद होने के बाद हरियाणा सरकार ने नीता को सरकारी जॉब ऑफर की थी, लेकिन नीता ने आरामदायक नौकरी चुनने के बजाय आर्मी को चुना। सलेक्शन के बाद नीता जल्द 49 सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग पर जाएंगी। इस दौरान उनके बच्चे की देखभाल उनका परिवार करेगा। नीता बताती हैं कि आर्मी जॉइन करने के मेरे फैसले पर मेरे परिवार ने मुझे पूरा सहयोग दिया। अब मेरे बेटे अर्जुन की देखभाल के लिए या तो मेरे सास-ससुर दिल्ली आएंगे या मेरे बेटे को अपने साथ गांव ले जाएंगे।