रीमा दास ने कहा, विलेज रॉकस्टार को मिला अवॉर्ड पूरे असम के लिए गर्व की बात

Daily news network Posted: 2018-04-14 15:45:49 IST Updated: 2018-04-14 16:09:37 IST
रीमा दास ने कहा, विलेज रॉकस्टार को मिला अवॉर्ड पूरे असम के लिए गर्व की बात
  • असम की फिल्म निर्माता रीमा दास को उनकी फिल्म 'विलेज रॉकस्टार' के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला है जिससे रीमा की खुशी छुपाए नहीं छुप रही है

गुवाहाटी

असम की फिल्म निर्माता रीमा दास को उनकी फिल्म 'विलेज रॉकस्टार' के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला है, जिससे रीमा की खुशी छुपाए नहीं छुप रही है। उन्होंने कहा कि 29 सालों बाद मिला यह अवार्ड असम के लिए बेहद सम्मान की बात है।

65वें राष्ट्रीय पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का अवार्ड जितने के बाद रीमा में कहा कि इस खुशी को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है, यह अवार्ड ना सिर्फ मेरे लिए बल्कि असम के लिए भी सम्मान की बात है।  रीमा आगे कहती हैं कि फिल्म पुरस्कार देने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार टीम का मैं दिल से आभार करती हूं। साथ ही मैं अपने परिवार का भी धन्यवाद करूंगी जो हर वक्त मेरे साथ खड़े रहा और मुझे इतनी हिम्मत और हौसला दिया की मैं फिल्म 'विलेज रॉकस्टार' बनाने में कामयाब रही।



बता दें कि असम की फिल्म निर्माता रीमा दास द्वारा लिखित, निर्देशित और निर्मित फिल्म 'विलेज रॉकस्टार' ने 65वें राष्ट्रीय पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का अवार्ड जीता है। इसके अलावा 'विलेज रॉकस्टार' को 2017 की सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्म के लिए बेस्ट फिल्म क्रिटिक्स ऑफ इंडिया अवार्ड, जैक्सन इक्वैलिटी अवार्ड, यंग क्रिटिक्स चॉइस, और ऑक्सफाम बेस्ट फिल्म जैसे कई अवॉर्ड मिले हैं। जज की भूमिका में जाने माने अभिनेता और फीचर फिल्म श्रेणी के जूरी प्रमुख शेखर कपूर के साथ कन्नड़ निर्देशक पी शेषाद्री, पटकथा लेखक इम्तियाज हुसैन, अभिनेता गौतमी तदिमल्ला, गीतकार मेहबूब आदि शामिल थे।



29 सालों बाद मिला सम्मान


राष्ट्रीय फि‍ल्म पुरस्कार फि‍ल्मों के क्षेत्र में दिये जाने वाले भारत के काफी पुराने पुरस्कार हैं, जो साल 1954 से दिए जा रहे हैं। इस बार ये द‍िल्‍ली में 3 मई को प्रदान क‍िए जाएंगे। असमिया फिल्म 'विलेज रॉकस्टार्स' ने 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार हासिल किया है। 29 वर्ष बाद किसी असमिया फिल्म ने यह सम्मान हासिल किया है। इससे पहले वर्ष 1987 में जाहनु बरुआ की 'हलोधिया चोरये बोधन खई' ने यह पुरस्कार जीता था।



एक बच्ची की कहानी है विलेज रॉकस्टार


यह फिल्म असम के एक छोटे से गांव की कहानी को दिखाता है। फिल्म में रीमा के गांव छाय्गओं की ही एक नन्हीं कलाकार हैं। फिल्म की कहानी एक गरीब, लेकिन एक साहसी लड़की की है जो एक गिटार खरीद कर संगीतकार बनना चाहती है। रीमा दास बताया था कि गांव में अपनी पहली फिल्म की शूटिंग करते समय इस फिल्म का विचार मेरे दिमाग में आया था। मैं इन अद्भुत बच्चों से मिली और तभी से बड़े पर्दे पर इन बच्चों की कहानी दिखाने के लिए उत्साहित हो गई। बता दें कि विलेज रॉकस्टार 10 वर्षीय धुनू की कहानी है, जिसकी देखरेख उसकी विधवा मां करती है। गरीबी में उसका पालन-पोषण करना और बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना, वह एक मजबूत शख्सियत वाली महिला थी। उसकी दृढ़ता समझौता न करने की प्रवृत्ति उसे और अधिक मजबूत बना देती है।