देश में एक राॅयल एेसा भी, सब कुछ छोड़कर बन गया संन्यासी

Daily news network Posted: 2018-04-17 11:39:14 IST Updated: 2018-04-17 12:31:00 IST
देश में एक राॅयल एेसा भी, सब कुछ छोड़कर बन गया संन्यासी
  • आजादी से पहले देश की सैकड़ों राॅयल फैमिली भारत के अलग-अलग हिस्सों में राज करती थीं। आजादी के बाद इनका विलय हो गया था। लेकिन इनका रूतबा पहले की तरह ही बरकरार था।

गंगटाेक।

आजादी से पहले देश की सैकड़ों राॅयल फैमिली भारत के अलग-अलग हिस्सों में राज करती थीं। आजादी के बाद इनका विलय हो गया था, लेकिन इनका रूतबा पहले की तरह ही बरकरार था। इन परिवारों ने इसके लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। कुछ ने तो राजनीति का रूख कर लिया। राजनीति का रूख करने वाली राॅयल फैमिली में मध्‍य प्रदेश की सिंधिया और पंजाब में पटियाला रॉयल फैमिली है।

 

कुछ ने अपनी बेशकीमती प्रॉपर्टी को होटल, बार, रेस्‍टोरेंट या मैरिज हॉल में बदल दिया। इसमें राजस्‍थान के रजवाड़ों का नाम सबसे आगे हैं, लेकिन आज हम आपको जिस राॅयल फैमिली के बारे में बताने जा रहे हैं उसकी कहानी इनसे अलग है।



देश में चलती थी पिता की हुकूमत

पूर्वोत्तर के राज्य सिक्किम में वांग्‍चुक नामग्‍याल के पिता की हुकूमत चलती थी, लेकिन आज वे संन्यासी बन चुके हैं। वह सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नेपाल आैर भूटान में फैले सैकड़ो बौद्ध मठों में ध्‍यान और साधना करते हैं। आपको बता दें कि पुरानी हुकूमत के नाम पर उनके पास सिर्फ यादें हैं आैर सामने अध्यात्म का बड़ा संसार।


1642 में सिक्किम पर शुरू किया था शासन

 

नामग्‍याल फैमिली ने 1642 से सिक्किम पर शासन करना शुरू किया था। फुटसोंग नामग्‍याल इसके पहले शासक थे, वहीं पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल इसके आखिरी शासक थे। 1975 में सिक्किम के भारत में विलय तक वे राजा के पद पर रहे। इसके बाद सिक्किम भारत का हिस्‍सा बन गया। पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल की मौत 1982 में हुई। सिक्किम में राजा को चोग्‍याल कहा जाता है, इसका मतलब होता है, धर्मराज।


पिता की गद्दी गई तो 22 साल के थे वांग्‍चुक नामग्‍याल  


सिक्किम का भारत में आधिकारिक विलय 1975 में हुआ। भारत के पक्ष में सिक्किम की जनता ने राजा पाल्‍डेन थोंडप नामग्‍याल के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इसके चलते भारत को वहां दखल देना पड़ा और संविधान संशोधन के जरिए सिक्किम भारत का एक राज्‍य बन गया। यह सब जब हो रहा था तब वांगचुक नामग्‍याल करीब 22 साल के थे। वह अपने पिता के दूसरे बेटे थे। वह 1952 में पैदा हुए और अब करीब 64 साल के हो चुके हैं। उनके बड़े भाई और एक बहन की हादसे में मौत हो गई थी। वह शाही परिवार के एक मात्र वारिस हैं।

छोड़ दी शाही पदवी 


राॅयल फैमिली से जुड़े लोग अक्‍सर इस फिराक में रहते हैं कि कैसे उनकी संपत्ति में और इजाफा हो। हालांकि वांग्‍चुक नामग्‍याल जब बड़े हुए तो उन्‍होंने सबकुछ छोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 35 साल पहले उन्‍होंने अपनी शाही पदवी ही छोड़ दी। इसके बाद वह बौद्ध संन्‍यासी हो गए। वह आमतौर पर पब्लिक में कम दिखाई पढ़ते हैं।  वह पिछले 35 साल से सिर्फ ध्‍यान और साधना कर रहे हैं और यही उनके जीवन का सत्‍य है।


 


पिता के क्‍लेम पर भी नहीं जताया दावा


नामग्‍याल फैमिली से जुड़े कुछ लोगों ने इलायची के कई बगीचों के मालिक हैं, जबकि कुछ के पास दुनिया भर के
कई बड़ें होटलों में हिस्‍सेदारी है। हालांकि वांगचुग इन सबसे अलग हैं। यहां तक उन्‍होंने पिता के 110 करोड़ रुपए के क्‍लेम का मुकदमा भी छोड़ दिया, जिसका दावा उनके पिता ने कभी भारत सरकार के खिलाफ ठोका था। उनके पिता ने यह दावा सिक्किम को भारत में मिलाने के हर्जाने के एवज में ठोका था।


35 सालों से जी रहे हैं संन्‍यासी का जीवन 


वांग्‍चुक पिछले 35 सालों से संन्‍यासी का जीवन जी रहे हैं। इस दौरान गंगटोक स्थित उनके पैत्रिक महल में भी उनका आना जाना हुआ। हालांकि वहां उन्‍होंने कभी रात नहीं गुजारी। वह हमेशा मठ में ही सोते हैं और वहीं ध्‍यान साधना करते हैं। उन्‍हें कई बार नेपाल और भूटान की गुफआों में भी कठित योग साधना करने पाया गया है।  उन्‍होंने 1982 में अपने पिता की मौत के बाद घर छोड़ा था और फिर उन्‍होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।