जानिए क्‍या है "अफ्सपा" कानून, कब हुआ पूर्वोत्तर में लागू

Daily news network Posted: 2018-04-22 15:10:19 IST Updated: 2018-04-22 16:46:23 IST
जानिए क्‍या है
  • “अफस्पा” का नाम तो सुना ही होगा आपने बीते दिनों इसको राज्यों से खत्म करने के लिए भी कई मांगे उठी थी। बता दें कि 45 साल पहले भारतीय संसद ने “अफस्पा” यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट 1958 को लागू किया

45 साल पहले भारतीय संसद ने “अफस्पा” यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट 1958 को लागू किया, जो एक फौजी कानून है, जिसे “डिस्टर्ब” क्षेत्रों में लागू किया जाता है। यह कानून सुरक्षा बलों और सेना को कुछ विशेष अधिकार देता है।


अफस्पा को 1 सितंबर 1958 को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड सहित भारत के उत्तर-पूर्व में लागू किया गया था, इन राज्यों के समूह को सात बहनों के नाम से जाना जाता है। इसे भारतीय संघ से अलग पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा रोकने के लिए लागू किया गया था।



इन क्षेत्रों को माना जाता है डिस्टर्ब

विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषा, क्षेत्रीय समूहों, जातियों, समुदायों के बीच मतभेद या विवादों के कारण राज्य या केंद्र सरकार किसी क्षेत्र को “डिस्टर्ब” घोषित करती है।


अफस्पा के अधिकार के तहत सशस्त्र बलों के पास होती हैं ये शक्तियां

1. अफस्पा के अधिकार के तहत सशस्त्र बलों के पास शक्ति होती है कि वह राज्य में उनकी चेतावनी के बाद, यदि कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है और अशांति फैलाता है, तो सशस्त्र बल के विशेष अधिकारी द्वारा आरोपी की मृत्यु हो जाने तक अपने बल का प्रयोग कर सकती है।

2. अफसर किसी आश्रय स्थल या ढांचे को तबाह कर सकता है, जहां से हथियार बंद हमले का अंदेशा हो।

 

3.सशस्त्र बल किसी भी असंदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं। गिरफ्तारी के दौरान उनके द्वारा किसी भी तरह की शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  


4.अफसर परिवार के किसी व्यक्ति, सम्पत्ति, हथियार या गोला-बारूद को बरामद करने के लिए बिना वारंट के घर के अंदर जा कर तलाशी ले सकता है और इसके लिए जरूरी, बल का इस्तेमाल कर सकता है।

   

5.एक वाहन को रोक कर या गैर-कानूनी ढंग से जहाज पर हथियार ले जाने पर उसकी तलाशी ली जा सकती है।

   

6.यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो उसको जल्द ही पड़ोसी पुलिस स्टेशन में अपनी गिरफ्तारी के कारण के साथ उपस्थित होना होता है कि उसको क्यों गिरफ्तार किया गया।

   


7.सेना के अधिकारियों को उनके वैध कार्यों के लिए कानूनी प्रतिरक्षा दी जाती है।

  


8. सेना के पास इस अधिनियम के तहत अभियोजन पक्ष, अनुकूल या अन्य कानूनी कार्यवाही के तहत अच्छे विश्वास में काम करने वाले लोगों की रक्षा करने की शक्ति है। इसमें केवल केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर सकती है।


अफस्पा के तहत आने वाले राज्य

मई 2015 में, त्रिपुरा में कानून व्यवस्था की स्थिति की संपूर्ण समीक्षा के बाद, 18 सालों के बाद अंत में अफस्पा को इस राज्य से हटा दिया गया था, लेकिन पूर्वोत्तर के असम, नगालैंड, मणिपुर (नगरपालिका क्षेत्र इंफाल को छोड़कर), अरुणाचल प्रदेश (केवल तिरप, चंगलांग और लोंगडींग जिले और असम की सीमा के 20 किलोमीटर की बेल्ट तक), मेघालय (असम की सीमा से 20 किलोमीटर की बेल्ट तक सीमित) राज्यों में यह कानून लागू है। 



विशेषाधिकार


इस कानून के अंतर्गत सशस्त्र बलों को तलाशी लेने, गिरफ्तार करने व बल प्रयोग करने आदि में सामान्य प्रक्रिया के मुकाबले अधिक स्वतंत्रता है तथा नागरिक संस्थाओं के प्रति जवाबदेही भी कम है। अफ्सपा कानून के तहत सेना के जवानों को किसी भी व्‍यक्ति की तलाशी केवल संदेह के आधार पर लेने का पूरा अधिकार प्राप्‍त है।



इरोम शर्मिला ने अफ्सपा हटाने के लिए करा 16 साल संघर्ष


इस कानून का विरोध करने वालों में मणिपुर की कार्यकर्ता इरोम शर्मिला का नाम प्रमुख है, जो इस कानून के खिलाफ 16 वर्षों से उपवास पर थी। उनके विरोध की शुरुआत सुरक्षा बलों की कार्यवाही में कुछ निर्दोष लोगों के मारे जाने की घटना से हुई। संयुक्‍त राष्‍ट्र के मानवाधिर आयोग के कमिश्‍नर नवीनतम पिल्‍लई ने 23 मार्च 2009 को इस कानून के खिलाफ जबरदस्‍त आवाज उठायी थी और इसे पूरी तरह से बंद कर देने की मांग की थी।