मानव तस्करी के मामलों में असम है टॉप पर,ये बड़ी वजह

Daily news network Posted: 2018-04-20 15:49:49 IST Updated: 2018-04-20 16:59:43 IST
मानव तस्करी के मामलों में असम है टॉप पर,ये बड़ी वजह
  • मानव तस्करी के मामले में असम पूरे देश में सबसे बड़ा गढ़ बन गया है,राज्य में फैली गरीबी,बाढ और बेरोजगारी के कारण यहां मानव तस्कर काफी सक्रीय रहते हैं।

गुवाहाटी

मानव तस्करी के मामले में असम पूरे देश में सबसे बड़ा गढ़ बन गया है। राज्य में फैली गरीबी, बाढ़ और  बेरोजगारी के कारण यहां मानव तस्कर काफी सक्रीय रहते हैं। बाढ़ या हिंसा के बाद सरकार लोगों का  कैम्पों में रहने का इंतजाम सरकार करती है और यहीं से शुरू होता है मानव तस्करों काल जाल। इन विस्थापित शिविरों के आसपास तस्कर अपना डेरा डाल लेते हैं और वहां की महिलाओं-लड़कियों को अपने जाल में फसाते हैं।



क्यों बढ़ रहे हैं तस्करी के मामलें


राज्य में बढ़ते तस्करी की वजह असम की परिस्थिति को माना जा रहा है जहां बाढ़, उग्रवाद, गरीबी, बेरोजगारी आदि से परेशान लोग चंद पैसों और उज्जवल भविष्य के प्रलोभन में आकर तस्करी के शिकार हो जाते हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार असम में 2011 के अन्दर मानव तस्करी का शिकार हुए 93 लोगों में से 36 नाबालिग थे और इनमें से 28 लड़कियां थीं। यह आंकड़ा 2013 में बढ़कर 188 हो गया और इनमें से 18 साल से नीचे की 94 लड़कियां शामिल थीं।


महिलाओं और बच्चों को काम दिलाने का झांसा देकर ले जाया जाता है और कई शहरों में बेच दिया जाता है। इसके साथ ही नाबालिग लड़कियों को दूसरे राज्यों में वेश्यावृति के काले धंधे में ढकेला जाते है, तो वहीं छोटे लड़कों को सस्ते बाल मजदूर के रूप में प्रयोग किया जाता है। हरियाणा जैसे राज्यों में गिरते लैंगिक अनुपात के कारण लड़कियों की मांग ज्यादा है यहां लड़की को शादी के नाम पर खरीदा और बेचा जाता हैं।  राज्य में फैली गरीबी भी तस्करों को मजबूत करने का एक बड़ा कारण है। असम में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां मां-बाप ही अपनी बच्चियों को 6 से 7 हज़ार रूपए में तस्करों को बेच दिया।



इन इलाकों में सबसे ज्यादा होती है मानव तस्करी


असम के कुछ ऐसे इलाके हैं जहां तस्कर सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। इन इलाकों में असम का सोनितपुर, धमाजी, लखीमपुर, कोकझार और कामरूप ये ऐसे जिले हैं, जो बाढ़ और हिंसा की चपेट में सबसे ज्यादा रहते हैं, जिसके कारण यहां गरीबी की मार झेल रहे लोगों को बहकाना सरल है। इसके साथ ही राज्य में तस्करों ने प्लेसमेंट एजेंसी के नाम पर काला कारोबार शुरू किया हुआ है, जो काम दिलाने के नाम पर लड़कियों के इंटरव्यूज लेती हैं और फिर दूसरे राज्यों में बेच देते हैं।


क्या कहते हैं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े


राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार 2016 में भारत में मानव तस्करी के 8,000 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिसमें 182 विदेशियों सहित कुल 23,000 पीड़ितों का रिहा कराया गया है। एनसीआरबी  के ताजा आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में कुल 15,379 पीड़ितों में से 9,034 पीड़ितों ( कुल 58 प्रतिशत) की आयु 18 वर्ष से कम थी, वहीं साल 2016 में रिहा कराए गए 14,183 पीड़ितों की आयु 18 वर्ष से कम थी। असम में बाल तस्करी के भी सबसे ज्यादा मामले पाए गए है।


देश भर के 1317 बाल तस्करी मामलों में से 38 प्रतिशत मामले असम से ही है।  सबसे अधिक मामले 3,579 (कुल का करीब 44 प्रतिशत) बंगाल में दर्ज किए गए इसके साथ ही साल 2015 में असम पहले और बंगाल (1,255 मामलों के साथ) दूसरे स्थान पर था। साल 2016 में असम में मानव तस्करी के 91 मामले (1.12 प्रतिशत) दर्ज किए गए।