असम में हर साल होती हैं 100 से ज्यादा हाथियों की मौत, कब रुकेगा ये खूनी संघर्ष

Daily news network Posted: 2018-03-12 15:23:53 IST Updated: 2018-03-12 16:26:45 IST
असम में हर साल होती हैं 100 से ज्यादा हाथियों की मौत, कब रुकेगा ये खूनी संघर्ष
  • असम में हाथियों और इंसानों के बीच चल रहा संघर्ष नया नहीं है कई बार राज्य से हाथियों के हमले में इंसानों और कई बार इंसानों की वजह से हाथियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।

गुवाहाटी

असम में हाथियों और इंसानों के बीच चल रहा संघर्ष नया नहीं है कई बार राज्य से हाथियों के हमले में इंसानों और कई बार इंसानों की वजह से हाथियों को अपनी जान गवानी पड़ती है बात करें अगर बीते एक साल की तो इस एक साल मेंअप्राकृतिक कारणों के चलते हुई है 100 से ज्यादा हाथियों की मौत  रेलगाड़ियों से एक्सीडेंट होने और बिजली के झटकों की वजह से हुई है तो वहीं दूसरी ओर एक वर्ष में हाथियों के साथ संघर्ष में करीब 100 इंसान की मौत हो गई है।


आज इस समस्या ने भयानक रूप धारण कर लिया है हालांकि इसके हल के लिए असम वन विभाग ने कई कदम उठाए हैं, जिसमें जंगली हाथियों की निगरानी के लिए जिलों में स्थानीय समन्वय समितियों का गठन करना और हाथी की निगरानी के लिए भी एक दल बनाया गया है लेकिन बावजूद इसके इसके इस गंभीर मुद्दे का हल बेहद दूर दिखाई दे रहा है।


असम के वन मंत्री प्रमिला राणी ब्रह्मा ने कहा कि "हम जंगली हाथियों की लगातार हो रही मौतों से चिंतित हैं इसके साथ-साथ इस संघर्ष के कारण इंसानों की हो रही मौतों को लेकर भी चिंतित हैं। मानव-हाथियों के बीच संघर्ष के खतरे को रोकने के लिए विभाग द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं।



मानव और हाथी के बीच इस संघर्ष के कारण हो रही मौतों को रोकने के लिए विभाग द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा देते हुए मंत्री ने कहा कि विभाग अबआधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए रेल की पटरियों पर सेंसर लगाने की योजना बना रहा है। इसके साथ हर जिले में ग्रामीणों के साथ-साथ वन अधिकारियों को संपर्क बनाने के लिए भी कहा गया है जिसके लिए विभाग जल्द ही एक मोबाइल ऐप भी ईजाद करेगा ईजाद करेगा, ताकि हाथियों के झुंडों के बारे में जानकारी साझा की जा सके।  इसके साथ ही ब्रह्मा ने बताया कि सौर ऊर्जा से चलनेवाला हम एक बिजली का बाड़ा भी बनाएंगे जिससे किसनों के खेतों और घरों को हाथियों के हमले से बचाया जा सके। 


आपको बता दें कि एशिया के 60 फ़ीसदी हाथी भारत में रहते हैं और इनकी सबसे ज़्यादा आबादी कर्नाटक में है, इसके बाद असम का नंबर आता है जहां इनकी संख्या 5,700 से भी अधिक है, असम में साल 2013 से 2017 के बीच हाथियों के हमलों में 463 इंसान मारे गए हैं जिसमें असम के उदलगुरी जिले में सबसे ज्यादा इंसानों की मौत हुई है। इसी तरह, 2013-2017 के दौरान मानव बस्तियों पर जंगली हाथियों के हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 374 व्यक्ति घायल हो गए हैं।


वन विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक हर साल असम में होने वाली विभिन्न घटनाओं के कारण सौ हाथियों मौत हो जाती हैं। हालांकि, वन्यजीव एनजीओ द्वारा दिए गए आंकड़े इससे मेल नहीं खाते  हैं जिसमें कहा गया है कि हर साल शिकार करने, ट्रेनों की चपेट में आने, जहर और बिजली के झटके लगने से हाथियों की मौत हो जाती है।


पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, 2013 से 2014 के बीच 72 हाथियों की मौत हुई है. जबकि 2012 में यह संख्या 100 से भी अधिक थी, संरक्षण संस्थाओं के आंकड़े के मुताबिक, 2001 से 2014 के बीच अवैध शिकार, गाड़ियों, ज़हर, करंट लगने से 225 हाथियों की मौत हो गयी। संरक्षणकर्ता कहते हैं कि असम में हाथी पहले से अधिक आक्रामक हो गये हैं क्योंकि उनके रहने की जगहें कम होती जा रही हैं और जंगलों पर दिन प्रति दिन कब्जा होता जा रहा है जिसकी वजह से हाथी खाने की तलाश में इंसानी बसरों पर हमला करते हैं।