IPFT के मेबेर जमातिया पर बिप्लब सरकार ने जताया भरोसा, दिया 2 मंत्रालय का प्रभार

Daily news network Posted: 2018-03-10 18:58:46 IST Updated: 2018-03-10 19:09:15 IST
IPFT के मेबेर जमातिया पर बिप्लब सरकार ने जताया भरोसा, दिया 2 मंत्रालय का प्रभार
  • त्रिपुरा की बिप्लब सरकार ने आईपीएफटी नेता मेबेर के जमातिया को मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद शनिवार को आदिवासी कल्याण और वन विभाग का प्रभार दिया है।

अगरतला।

त्रिपुरा की बिप्लब सरकार ने आईपीएफटी नेता मेबेर के जमातिया को मंत्रिमंडल में शामिल करने के बाद शनिवार को आदिवासी कल्याण और वन विभाग का प्रभार दिया है। शुक्रवार को इन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष अन्य आठ विधायकों के साथ मंत्री पद की शपत ली थी। त्रिपुरा के 12 मंत्रियों की कैबिनेट में से 9 के लिए पोर्टफोलियो की घोषणा कर दी गई है।

देब के साथ शपथ लेने वाले अन्य मंत्रियों में एन सी देवबर्मा (इंडीजीनियस पीपुल्स फ्रंट), रतनलाल नाथ (भाजपा), सुदीप रॉयबर्मन (भाजपा), प्रसेनजीत सिंहरॉय (भाजपा), मनोज कांति देब (भाजपा) मेबेर के जमातिया (आईपीएफटी) और एकमात्र महिला एवं सबसे युवा चेहरे के रूप में शांतना देवबर्मा शामिल हैं।

जमातिया ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में आश्रमबारी सीट से जीत दर्ज की है। इस सीट पर 1972 से ही माकपा का दबदबा था। पिछले विधानसभा चुनाव में माकपा उम्मीदवार अघोर देवबर्मन ने कांग्रेस उम्मीदवार अमिया कुमार देवबर्मन को 7217 मतों से हराया था और माकपा के खाते में जीत दर्ज की थी। हालांकि इस बार सीपीएम के लिए ये सीट बचाना मुश्किल हो गया। यहां से आईपीएफटी के मेवार कुमार जमातिया ने 6987 वोट से जीत दर्ज कर माकपा से इस सीट को छीन लिया है।

गौरतलब है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमिया देवबर्मन पर दांव लगाया, लेकिन इस बार कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार अमिया देवबर्मन को महज 9234 तो वहीं दो बार विधायक रह चुके माकपा उम्मीदवार सचिद्र देवबर्मन को 13765 वोट मिले। इससे पहले 2003 में हुए चुनाव में माकपा ने सचिद्र देवबर्मन को कांग्रेस ने अमिया का चुनावी मैदान में उतारा और इस बार कांग्रेस को 1486 वोटों से हारना का सामना करना पड़ा और माकपा का दबदबा इस सीट पर कायम रहा।

1998 में माकपा ने इस सीट पर महिला उम्मीदवार संध्या रानी देव बर्मा को टिकट दिया तो कांग्रेस ने कृपा साधन जमातिया को। लेकिन इस बार भी कांग्रेस का दांव फेल रहा और कांग्रेस उम्मीदवार कृपा साधन को 2658 वोट तो वहीं माकपा उम्मीदवार संध्या को 11907 वोट मिले और इस बार भी माकपा के सर जीत का सेहरा सजा। 1993 में माकपा की ओर से चार बार विधायक रह चुके बिंध्या चंद्र देव बर्मन तो वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ  मैदान में कांग्रेस उम्मीदवार सुधीर देव बर्मन थे। 1993 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुधीर को मात्र 2407 संतोष करना पड़ा तो वहीं बिंध्या चंद्र को 14820 वोट मिले।

1988 के विधानसभा चुनाव में माकपा के बिंध्या चंद्र देव बर्मन ने कांग्रेस उम्मीदवार अरूण कुमार देवबर्मन को 9386 मतों से हराकर माकपा की शानदार जीत दर्ज की। इससे पहले 1983 में हुए चुनाव में भी माकपा की ओर से बिंध्या चंद्र देव बर्मन का ही टिकट मिला था और उस समय भी बिंध्या चंद्र देव बर्मन ने कांग्रेस उम्मीदवार किशालय कांती देवबर्मन को बुरी तरह मात दी थी। इस बार भी माकपा के खाते में जीत दर्त हुई थी। 1983 में बिंध्या चंद्र ने  कांग्रेस उम्मीदवार किशालय कांती को 9769 मतों से हराया था।


1977 में बिंध्या चंद्र देव बर्मन पहली बार माकपा की टिकट से चुनाव लड़ रहे थे और इस बार कांग्रेस ने दयानंद देव बर्मन को  बिंध्या चंद्र देव बर्मन के खिलाफ  चुनावी दंगल में उतार, लेकिन कांग्रेस जीत नहीं सकी कांग्रेस को इस सीट से मात्र 1125 वोट मिले और माकपा को 9506। अगर हम बात करें 1972 के विधानसभा चुनाव की तब भी इस सीट पर माकपा की ही विजय हुई थी। माकपा के उम्मीदवार नृपेंद्र चक्रबोर्ती ने कांग्रेस के उम्मीदवार अरूण कर को 2153 मतों से हराया था और माकपा की जीत दर्ज की थी। 1972 से ही इस सीट पर माकपा अजेय रही है और उसकी जीत का सिलसिला जारी रहा है, जो कि 2018 में टूट गया।