अखिल गोगोई का आरोपः NRC पर बीजेपी कर रही है वोट बैंक की राजनीति

Daily news network Posted: 2018-04-14 15:24:37 IST Updated: 2018-04-14 17:19:50 IST
  • केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में राज्य के कई दल व संगठन विरोध कर रहे हैं, वहीं आज शुक्रवार को कृषक नेता अखिल गोगोई ने

गुवाहाटी

राज्य के कई दल व संगठन नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को कृषक नेता अखिल गोगोई ने कहा कि केंद्र सरकार जितना भी जोर लगा ले, लेकिन हम किसी भी हालत में इस विधेयक को पास नहीं होने देंगे, क्योंकि यह विधेयक असम विरोधी है।


एनआरसी के विधेयक पर आगामी 17 अप्रैल को जन सुनवाई होगी। इस विधेयक के विरोध में कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के साथ अन्य सहयोगी संगठन काला झंडा फहराकर इसका विरोध करेंगे। इस बात की जानकारी गांधी बस्ती स्थित एनएसएस के मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दी गई।



कृषक नेता अखिल गोगोई ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार राज्यवासियों की भावनाओं को ताक पर रखकर अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिए विदेशियों को असम में हमेशा के लिए बसाना चाहती है। उन्होंने असम लोक सेवा आयोग (एपीएससी) की जांच को लेकर भी असंतुष्टि जताई।


असम कांग्रेस ने भी एनआरसी को लेकर सरकार को घेरा


वहीं असम कांग्रेस भी एनआरसी को लेकर सरकार और संघ को घेर चुकी है। असम प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रितुपर्ण कुवंर ने कहा था की एनआरसी का कार्य सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में चल रहा है, लेकिन रविवार को आरएसएस के एक नेता ने जिस तरह का बयान दिया है वह पूरी तरह से न्यायलय की अवमानना है। उन्होंने एनआरसी पर आरएसएस के बयान को एक सरकारी साजिश बताते हुए कहा कि संघ के नेताओं के बयान से असमिया कहावत- सरसों की डाली पर भूत का बसेरा जैसा प्रतीत होता है।


कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि न्यायालय के निर्देश के अनुसार एनआरसी अघतन की प्रक्रिया को पूरा करने में हजारों सरकारी कर्मचारी लगे हुए हैं और यदि कोई गड़बड़ी हुई तो राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल संबंधित अधिकारीयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कदम उठाएं, क्योंकि हाल ही में उन्होंने कहा था कि एनआरसी के काम में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ।



31 मई तक पूरा हो एनआरसी का काम


असम में नागरिकों के राष्ट्रीय पंजीकरण (एनआरसी) प्रकाशन की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष 31 मई तक पूरी करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह काम बिना किसी हस्तक्षेप के निर्बाध रूप से जारी रहना चाहिए। इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई 27 मार्च को होगी। जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने मंगलवार को इस काम में तेजी लाने को कहा। केंद्र और एनआरसी के राज्य समन्वयक की दलील सुनने के बाद पीठ ने यह टिप्पणी की थी। सरकारी पक्ष ने कहा था कि यह काम 31 मई की जगह 31 जुलाई तक पूरा हो सकेगा। असम में अवैध आव्रजकों की पहचान करने के लिए एनआरसी तैयार की जा रही है।