नागालैंड में केंद्र और उग्रवादी गुटों के बीच युद्धविराम समझौते की मियाद एक साल और बढ़ी

Daily news network Posted: 2018-04-21 16:55:28 IST Updated: 2018-04-21 17:59:14 IST
नागालैंड में केंद्र और उग्रवादी गुटों के बीच युद्धविराम समझौते की मियाद एक साल और बढ़ी
  • नागालैंड में केंद्र सरकार और विद्रोही समूहों के बीच युद्धविराम समझौते की मियाद और एक साल के लिए बढ़ा दी गई है।

नागालैंड में केंद्र सरकार और विद्रोही समूहों के बीच युद्धविराम समझौते की मियाद और एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। केंद्र और विद्रोही समूहों के बीच शुक्रवार को युद्धविराम समझौते को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। यह समझौता 28 अप्रैल से प्रभावी होगा।


युद्धविराम समझौता केंद्र सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-रिफॉरमेशन(NSCN-R) और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-नियोपाओ कोनयक/किटोवी(NSCN-NK) के बीच है।


गृह मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, '27 अप्रैल, 2019 को यह संघर्ष विराम खत्म हो रहा है। एनएससीएन/एनके और एनएससीएन/आर के साथ इस संघर्ष विराम को आगे भी जारी रखने का फैसला पहले से ही तय था। यह समझौता 28 अप्रैल से प्रभावी रूप से एक वर्ष के लिए लागू हो जाएगा।'


गृह मंत्रालय की तरफ से संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग ने गुरुवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर किया। वहीं एनएससीएन/एनके के पर्यवेक्षक तोशी लोंगकुमार, एनएससीएन/आर के सह पर्यवेक्षक विनीहो किहो स्वू और जीपीआरएन/एनएससीएन के पर्यवेक्षक जैक जिमी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।


नागालैंड में एनएससीएन-आईएम और एनएससीएन-खापलांग दो विद्रोही समूह राज्य के कई अन्य सशस्त्र समूहों में से हैं।


एनएससीएन(आई-एम) ने 1997 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किया था। तब से संगठन इस समझौते पर हस्ताक्षर करता आ रहा है। वहीं जून 2015 में मणिपुर में एक सैन्य काफिले पर हमला करने के बाद एनएससीएन-के साथ समझौता टूट गया था। इस हमले में 18 सैनिक मारे गए थे।