सुषमा स्वराज के आगे झुका चीन, भारत को दिया बड़ा तोहफा

Daily news network Posted: 2018-04-23 13:44:27 IST Updated: 2018-04-23 17:45:25 IST

बीजिंग।

चीन ने भारत के साथ ब्रह्मपुत्र और सतलज नदी में जल प्रवाह से संबंधित (हाइड्रोलॉजिकल) आंकड़ों को साझा करने की व्यवस्था फिर शुरू करने पर सहमति जताई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसकी जानकारी दी। दोनों देशों के सैनिकों के बीच डोकलाम क्षेत्र में तनातनी के बाद से चीन ने इन नदियों के प्रवाह की स्थित की सूचनाएं भारत के साथ साझा करने का सिलसिला बंद कर दिया था, जबकि ये आंकड़े बाढ़  का पूर्वानुमान लगाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं।



शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए सुषमा स्वराज यहां चार दिवसीय यात्रा पर पहुंचीं। स्वराज ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की। दोनों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों तथा संबंधों को सुधारने के लिए उच्च - स्तरीय वार्ता बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। स्वराज ने वांग के साथ संयुक्त मीडिया कार्यक्रम में कहा कि मैं 2018 में ब्रह्मपुत्र और सतलज नदी से जुड़े आंकड़े फिर से साझा करने के चीन के कदम की प्रशंसा करती हूं, क्योंकि यह मुद्दा सीधे इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों से जुड़ा है।



पिछले महीने , भारत के जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर अपने चीनी समकक्षों से बात की थी। मौजूदा द्विपक्षीय समझौता व्यवस्था के तहत , चीन बाढ़ के मौसम के दौरान भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलज नदी की जल प्रवाह संबंधी जानकारी प्रदान करता है। दूसरी तरफ असम के मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर इस फैसले का स्वागत किया।







इसके साथ ही सिक्किम में नाथूला दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर भारत और चीन सहमत हो गए।  करीब 10 महीने पहले डोकलाम में पैदा हुए गतिरोध के बाद इस मार्ग से यात्रा को रोक दिया गया था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। दोनों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। विदेश मंत्री सुषमा ने चीनी विदेश मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा , कैलाश मानसरोवर यात्रा नाथू ला दर्रे के जरिए इस साल फिर शुरू हो रही है। सुषमा स्वराज ने कहा कि, मुझे पूरा विश्वास है कि चीनी पक्ष इस यात्रा नें भारतीय यात्रियों के पूर्ण सहयोग करेगा। बता दें कि यात्रा दो रास्तों लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) के जरिए कराई जाती है।