अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन, 30 दिनों में 35 बार की भारत में घुसपैठ

Daily news network Posted: 2018-04-16 09:22:48 IST Updated: 2018-04-16 09:22:48 IST
अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन, 30 दिनों में 35 बार की भारत में घुसपैठ
  • भारत के विरोध के बावजूद भी चीन अपने नाकाम इरादों से बाज नहीं आ रहा है, डोकलाम पर मुंह की खाने के बाद भी वह सीमा पर घुसपैठ कर रहा है।

भारत के विरोध के बावजूद भी चीन अपने नाकाम इरादों से बाज नहीं आ रहा है, डोकलाम पर मुंह की खाने के बाद भी वह सीमा पर घुसपैठ कर रहा है। इस बात का खुलासा ITBP ने अपनी रिपोर्ट में किया है जिसमें बताया गया है कि चीन ने पिछले एक महीने में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा घुसपैठ की है।


अरुणाचल में चीनी घुसपैठ

आईटीबीपी ने जो रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी है, उसके मुताबिक चीनी सेना  29 मार्च और 30 मार्च को अरुणाचल प्रदेश के असफिला इलाके में 4 किलोमीटर अंदर तक दाखिल हो गई थी। चीन ने 22 मार्च को अरुणाचल के डिचु में 6 बजकर 10 मिनट पर चीनी सैनिक 250 मीटर भारतीय सीमा में LAC क्रॉस कर दाखिल हुए. ITBP से कहासुनी के बाद चीनी सैनिक कुछ घंटे के बाद वापस लौटे। 28 मार्च को लद्दाख के डेसपांग इलाके में 19 किलोमीटर तक भारतीय सीमा में दाखिल होने के बाद वापस चले गए. यही नहीं पिछले 17 दिनों में चीनी सेना के हेलीकाप्टर तीन बार भारतीय हवाई सीमा में दाखिल हुए। ITBP ने गृह मंत्रालय को जानकारी दी है कि लद्दाख के डेपसांग एरिया में चीन ने लगातार घुसपैठ की है। 17 मार्च, 22 मार्च, 23 मार्च, 28 मार्च और 1 अप्रैल को चीन ने 10 से लेकर 19 किलोमीटर तक डेपसांग के इलाके में घुसपैठ की है।

इससे पहले भी चीन ने अरुणाचल प्रदेश के उत्तरी

पैंगोंग झील के पास गाड़ियों के जरिये 28 फरवरी, 7 मार्च और 12 मार्च 2018

को घुसपैठ की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पैंगोंग झील के पास 3 जगहों पर

चीनी सेना ने घुसपैठ की, जिसमें वे लगभग 6 किलोमीटर तक अंदर घुस आए थे।

आईटीबीपी जवानों के विरोध के बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए।


लद्दाख पर चीन की नजर

ITBP ने अपनी रिपोर्ट में जो खुलासे किए हैं वो काफी चौकाने वाले हैं, रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले 30 दिनों में चीन की सेना ने 35 बार LAC को पार किया है। ITBP की रिपोर्ट कहती है कि चीन ने इसी महीने उत्तरी लद्दाख के DBO में सुबह 7 बजे गाड़ी के जरिये 14 किलोमीटर भरतीय क्षेत्र में घुसपैठ की साथ ही चीनी सेना ने लद्दाख के ट्रिग हाईट इलाके में बीते मार्च महीने में भी जमकर घुसपैठ की जिसमें वह 18 मार्च, 21 मार्च, 24 मार्च और 30 मार्च को दो बार 8 किलोमीटर अंदर तक चीनी सैनिक घुस आए थे।


रिपोर्ट के मुताबिक़ लद्दाख के ट्रैक जंक्शन में सुबह 8.30 बजे 2 चीनी हेलीकॉप्टर ने घुसपैठ की, यही हेलीकॉप्टर लद्दाख के Burtse तक गए और करीब 18 किलोमीटर भारत के एयर स्पेस में रहे। चीन ने हेलीकॉप्टर से घुसपैठ कर भारत के एयरस्पेस का उल्लंघन किया, जिस पर ITBP ने अपना विरोध जताया। पिछले महीने 21 मार्च को चीनी सेना के 4 हेलीकाप्टर लद्दाख के ट्रिग हाईट और डेसपांग इलाके में देखे गये जो भारतीय सीमा में 17 किलोमीटर अंदर तक दाखिल हो गए थे। 27 मार्च को एक बार फिर से चीनी सेना के दो हेलीकाप्टर लद्दाख में देखे गये, जहां पर वो ठाकुंग पोस्ट से भारतीय सीमा में करीब साढे चार किलोमीटर अंदर तक हवाई सीमा में दाखिल हुए। साथ ही लद्दाख के पैंगांग सो में चीनी सेना ने पिछले कुछ दिनों में कई बार भारत में घुसपैठ की। गौरतलब है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश कि सीमाओं पर भी कब्ज़ा करना शुरू कर दिया है।


विदेश मंत्री सुषमा स्वराज करेंगी चीन का दौरा

चीन के साथ सीमा विवाद सहित सभी मुद्दों को सुलझाने के क्रम में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चीन दौरे पर जाएंगी। सुषमा स्वराज 22 अप्रैल को चीन एवं मंगोलिया की यात्रा पर जाएंगीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को यहां नियमित ब्रीफिंग में बताया कि स्वराज 22 और 23 अप्रैल को चीन की यात्रा पर रहेंगी जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगी। उनकी चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात भी होगी।


अभी तक पूरे नहीं हो पाए आधे भी प्रोजेक्ट

आपको बता दें कि चीन से लगी सीमा पर भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग जारी है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक पिछले ही महीने चीन ने यहां रणनीतिक लिहाज से संवेदनशील असाफिला इलाके में भारतीय पेट्रोलिंग पर सवाल उठाए हैं। चीन ने अपने इलाके में अतिक्रमण का आरोप लगाया, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया।


उलटे भारत का आरोप है कि चीन इस इलाके में कई बार सीमा का अतिक्रमण कर चुका है। चीन की हरकतों को देखते हुए ही भारत ने सरहदी इलाकों में बुनियादी ढांचा पक्का करने में तेज़ी लाई है। करीब साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपए की लागत से चीन से लगी सीमाओं पर सड़क निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे 73 प्रोजेक्ट्स में से 18 पूरे हो चुके हैं। बाकी प्रोजेक्ट 2020 तक पूरे किए जाने का लक्ष्य है।


देश की सुरक्षा में देरी क्याें?

इसमें कोई दो राय नहीं कि पहले की तुलना में चीन से लगी सरहद पर हमारा बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है, लेकिन अब भी चीन की तैयारियों के मुकाबले हम काफी पीछे हैं। भौगोलिक कठिनाइयां इसका एक कारण हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी की ढिलाई भी कम बड़ी वजह नही है। यहां सड़क निर्माण के जो प्रोजेक्ट 2012 तक पूरे होने थे, उम्मीद है 2020 तक पूरे हो ही जाएंगे, लेकिन सवाल यही है  कि देश की सुरक्षा से जुड़े कामों में इतनी देरी क्यों?