शहीद बेटे का माथा चूमकर मां ने बयां किया वो दर्द, सुनकर सबकी आंखे हो गई नम

Daily news network Posted: 2018-03-10 08:51:20 IST Updated: 2018-03-10 09:15:33 IST
शहीद बेटे का माथा चूमकर मां ने बयां किया वो दर्द, सुनकर सबकी आंखे हो गई नम
  • कई ख्वाब देखे थे, अभी तो कई अरमान बाकी थे ये शब्द एक बेबस मां के हैं जिसने अपना एक लौटा बेटा खो दिया है, यह दिल दहला देने वाली खबर

गुवाहाटी

कई ख्वाब देखे थे, अभी तो कई अरमान बाकी थे ये शब्द एक बेबस मां के हैं, जिसने अपना एकलौता बेटा खो दिया है। यह दिल दहला देने वाली खबर सुनकर हर किसी की आंखें नाम हो गई। असम में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए पंजाब में फाजिल्का के गांव जोड़की अंधेवाली निवासी अमरसीर सिंह को अंतिम विदाई दी गई।



शरहद से घर पहुंची शहीद की अर्थी तो बेटे का चेहरा देखकर मां ने कहा, कई ख्वाब देखे थे, अभी तो कई अरमान बाकी थे, अब उन्हें कौन पूरा करेगा। एक बेटा पहले ही छोड़कर चला गया था, अब तू भी जा रहा है। हम किसके सहारे जिएंगे।


शहीद अमरसीर की पत्नी वीरपाल कौर का भी रो-रोकर बुरा हाल था। वह हाथों में पति का चेहरा लेकर चुपचाप एकटक उसे देख रही थी। उसके मन में कई सवाल कौंध रहे थे, जिनका जवाब देने वाला तो चला गया था। वहीं मां और पत्नी की हालत देखकर हर आंख नम हो गई। पिता सुखमिंदर सिंह भी खुद को नहीं संभाल पा रहे थे।


शहीद अमरसीर सिंह करीब 12 साल पहले वह भारतीय सेना की सिख सिखलाईट 13 बटालियन में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। वह तीन माह पहले ही छुट्टी काट कर ड्यूटी पर गए थे। शहीद होने से एक दिन पहले ही उसने अपनी बेटी को फोन पर जन्मदिन की बधाई दी थी, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि ये बात आखिरी भी हो सकती है।



शहीद अमरसीर के परिवार में मां-बाप, पत्नी और दो बेटियां हैं। चार वर्षीय बेटी गुरनूर आत्म वल्लभ सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ती है। स्कूल का स्टाफ भी शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचा। प्रिंसिपल संगीता तिन्ना ने कहा कि स्कूल इस दुख की घड़ी में शहीद परिवार के साथ हैं। जो भी बन पड़ेगा, स्कूल जरूर करेगा। स्कूल प्रबंधन दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी वहन करेगा।



शहीद के पिता ने जैसे तैसे खुद को संभाला और बोले- मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके परिवार की सहायता करे। बेटा ही हमारे परिवार के लिए एक सहारा था। इसकी छोटी बेटी चार वर्ष तो दूसरी 4 महीने की है। घर का गुजारा चलाने के लिए उसकी बहू वीरपाल कौर को सरकारी नौकरी मिल जाए तो घर चलाना असान हो जाएगा।