अद्भुत है काली मां का ये मंदिर, इनके दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं बॉर्डर

Daily news network Posted: 2018-04-24 14:42:46 IST Updated: 2018-04-24 14:42:46 IST
अद्भुत है काली मां का ये मंदिर, इनके दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं बॉर्डर
  • पूर्वोत्तर के एक छोर पर बसा शांत और सुरम्य त्रिपुरा पर्यटन पर जाने के लिए आदर्श जगह है।

पूर्वोत्तर के एक छोर पर बसा शांत और सुरम्य त्रिपुरा पर्यटन पर जाने के लिए आदर्श जगह है। हरियाली ओढ़े लंबी-गहरी वादियां, घने जंगल, कुछ बेहद खूबसूरत महल, मंदिर और बौद्ध मठ। कुल मिलाकर त्रिपुरा ऐसी सुंदर जगह है जो आपको रोजमर्रा की चिंताओं को भूलने को मजबूर कर देगी। हालांकि अगर आप आध्यात्म की खोज के लिए त्रिपुरा जा रहे हैं तो आपको कमला सागर में मां काली के मंदिर जरूर जाना चाहिए। 




पंद्रहवीं सदी का बना यह मंदिर अब बिल्कुल बांग्लादेश की सीमा पर है। मंदिर के बगल में विशाल सुंदर सरोवर है। इस सरोवर में कमल के पुष्प खिले हैं। सरोवर के तट पर सामने ऊंचाई की ओर जाती सीढ़ियां काली माता के दरबार की ओर जा रही हैं। कमला सागर में आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है ।  आजादी के बाद कस्बा नामक छोटा सी जगह तो बांग्लादेश में चली गई पर काली मां का मंदिर हिंदुस्तान में ही रहा। कमला सागर मंदिर के ठीक बगल में बांग्लादेश सीमा की बाड़ लगी है। बाड़ के उस पार बांग्लादेश के नागरिक अपने खेतों में काम करते हुए दिखाई देते हैं।



साल में एक बार भाद्रपद आमवस्या पर  मंदिर में मेला लगता है। इस पूजा के खास अवसर पर बांग्लादेश के हिंदू परिवारों को भी काली मां के पूजा की अनुमति दी जाती है। यहां तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवान इसके लिए खास तौर पर बंग्लादेशी श्रद्धालुओं को रास्ता उपलब्ध कराते हैं। मां काली की पूजा करने के बाद वे श्रद्धालु वापस लौट जाते हैं। 


काली मां का ये मंदिर महाराजा धन माणिक्य का कार्यकाल  15वीं सदी में बनवाया गया। धन माणिक्य त्रिपुरा में माणिक्य वंश के सबसे प्रतापी राजा थे, उन्होंने कई मंदिर बनवाए। कहा जाता है ये मंदिर उनकी पत्नी कमला देवी ने बनवाया था। उन्होंने ही मंदिर के पास विशाल पुष्करणी सरोवर भी खुदवाया, जिसका नाम महारानी कमला देवी के नाम पर कमला सागर रखा गया। कमला देवी बड़ी ही परोपकारी और सहृदय महारानी थी। कहा जाता है कि उन्होंने अपने राज्य में चली आ रही नरबलि प्रथा को खत्म कराया था।



कमला सागर का ये मंदिर बाकी काली मंदिरों से थोड़ा अलग है। मंदिर में दसभुजा धारी महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा है। साथ में शिव भी स्थापित हैं। हर रोज मां की प्रतिमा का सुरूचिपूर्ण ढंग से श्रंगार होता है। हर साल भाद्रपद आमस्वया के समय यहां बड़ा मेला लगता है। मंदिर का परिसर बड़ा ही मनोरम है। 


कैसे पहुंचे- कमला सागर की दूरी अगरतला शहर से 28 किलोमीटर है। अगरतला से कमला सागर जाने के लिए नगरजल बस स्टैंड से टैक्सी या बस ली जा सकती है। उदयपुर मार्ग पर बिशालगढ़ से पहले गोकुल नगर स्टैंड पर उतर जाएं। गोकुल नगर से आटो रिक्शा कमला सागर जाते हैं। रास्ते में मधुपुर नामक गांव आता है। इस मार्ग में त्रिपुरा से आदर्श ग्रामीण परिवेश से साक्षात्कार होता है। आप चाहें तो अगरतला से सीधे टैक्सी बुक करके कमला सागर जा सकते हैं। इससे आपका समय बचेगा।



कहां ठहरें - कमला सागर में रहने के लिए कोमिला गेस्ट हाउस बना है। वैसे आप अगरतला शहर में ही रुक कर कमला सागर आ सकते हैं। कमला सागर में आपको खाने पीने के लिए एक दो छोटी दुकानें दिखाई देती हैं।  मंदिर परिसर में प्रसाद की दुकानें और कैफेटेरिया आदि भी है।