गुमशुदा हैं सीएम सोनोवाल! कॉलेज में लगे पोस्टर

Daily news network Posted: 2018-05-11 14:42:01 IST Updated: 2018-05-11 19:36:17 IST
  • नागरिकता संशोधन विधेयक (2016) काे लेकर विरोध पूरे असम में तेजी से फैलता जा रहा है।

गुवाहाटी।

नागरिकता संशोधन विधेयक (2016) काे लेकर विरोध पूरे असम में तेजी से फैलता जा रहा है। यहां तक की जातीय नाटक से पहचान बनाने वाले तथा मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की चुप्पी से परेशान छात्रों ने तो विरोध करने का नायाब तरीका खोज निकाला। छात्रों ने काॅलेज के मेन गेट पर मुख्यमंत्री के लापता होने के पोस्टर लगा डाले। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पर उनका विरोध किया।


पोस्टर से प्रशानिक महकमें में हडकंप

पोस्टर लगने की सूचना मिलते ही प्रशानिक महकमें में हडकंप मच गया। सुबह नौ बजे से पहले ही पुलिस ने इन सारे पोस्टर्स को फौरन हटवा दिया। बता दें के विश्वविद्यालय के छात्र मेघालय सरकार की तरह ही असम के मुख्यमंत्री से भी असमिया के अस्तित्व की रक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन जब मुख्यमंत्री उनके उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सके तो आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय की दीवारों पर मुख्यमंत्री के पोस्टर चिपका दिए।

गुमशुदा है जातीय नायक!

पोस्टर पर लिखा था कि असमिया समाज के इस नायक का कहीं पता नहीं है, उनकी कोर्इ खबर नहीं है, वे कहीं लापता हो गए है। अगर किसी का उनके बारे में पता चलता है तो हमें जरूर खबर करें। इसके साथ ही सीएम सोनोवाल की तस्वीर लगी हुर्इ थी। दूसरे पोस्टर में लिखा हुआ था कि हम नागारिकता संशोधन विधेयक का कड़े शब्दों में विरोध करते हैं। इस पोस्टर में किसी निवेदक का नाम नहीं था।

छात्र संघ के नेता का बयान

इस घटना पर काॅटन विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव निशी रंजन का कहना है कि यहां मुख्यमंत्री सोनोवाल आने वाले थे। इस पर छात्र संघ ने फैसला किया था कि उनका रास्त रोकते हुए विधेयक के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करेंगे। लेकिन उनकी जगह शिक्षा मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य आए। उन्होंने इस मामले में ज्ञापन सौंपा है अौर कहा है कि हमने जातीय नायक को चुना था लेकिन वह कहीं खो गया है। जिससे छात्र संघ खुद को ठगा हुअा आैर अपमानित महसूस कर रहा है।

पहली बार हुआ है एेसा विरोध प्रदर्शन

पोस्टर चिपकाएं जाने को लेकर भी छात्र नेता ने कहा कि यह घटना रात में ही हुर्इ थी। इसमें किसका हाथ यह बता पाना मुश्किल है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसमें छात्रों का हाथ हो सकता है आैर नहीं भी। बता दें कि एेसा पहली बार हुआ है जब मुख्यमंत्री के पोस्टर को चिपका कर किसी ने विरोध जताया हो। इस कारण से यह मामला गुरूवार को पूरे दिन चर्चा में रहा।