मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल, अब अल्फोंस के पास है ये जिम्मेदारी

Daily news network Posted: 2018-05-15 12:09:19 IST Updated: 2018-05-15 12:09:19 IST
मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल, अब अल्फोंस के पास है ये जिम्मेदारी
  • रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त एवं कारपोरेट मामलों के मंत्रालय का अस्थायी प्रभार सौंपा गया है

नयी दिल्ली।

रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त एवं कारपोरेट मामलों के मंत्रालय का अस्थायी प्रभार सौंपा गया है, जबकि स्मृति ईरानी से सूचना प्रसारण मंत्रालय लेकर कर्नल राज्यवद्र्धन सिंह राठौड़ को इसका स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। राष्ट्रपति भवन से आज रात यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि वित्त मंत्री अरुण जेटली की अस्वस्थता के कारण अनुपस्थिति में गोयल रेल एवं कोयला के अलावा वित्त एवं कारपोरेट मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त काम देखेंगे। 



विज्ञप्ति के अनुसार सूचना प्रसारण राज्य मंत्री एवं खेल एवं युवा मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कर्नल राठौड़ को सूचना प्रसारण मंत्रालय का भी स्वतंत्र प्रभार दिया गया है, जबकि ईरानी अब केवल कपड़ा मंत्रालय का काम देखेंगी। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में राज्य मंत्री एस एस आहलूवालिया का विभाग बदल कर उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री बनाया गया है। जबकि केजे अल्फोंस को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में राज्य मंत्री के दायित्व से मुक्त करके केवल पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाये रखा गया है। बतादें कि अल्फोंस को मेघालय चुनाव के वक्त बीजेपी ने चुनाव प्रभारी बनाया था। गौरतलब है कि जेटली का आज यहां अखिल भारतीय आयुर्विग्यान संस्थान (एम्स) में गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया जो सफल रहा। जेटली को लंबे समय तक कामकाज से दूर रहना पड़ेगा। 




बात दें कि तीन विवादों की वजह से स्मृति ईरान से सूचना प्रसारण मंत्रालय छीन लिया गया। इसमें राष्ट्रीय फिल्म अवाड्र्स समारोह का 70 से ज्यादा विजेताओं ने बहिष्कार किया। नाराजगी राष्ट्रपति के हाथों सिर्फ 11 लोगों को सम्मान दिलवाने पर थी। हालांकि राष्ट्रपति भवन ने कहा कि मंत्रालय को काफी पहले बता दिया था कि राष्ट्रपति सिर्फ एक घंटा रुकेंगे। मंत्रालय ने ऐन मौके पर विजेताओं को जानकारी दी। राष्ट्रपति भवन ने नाराजगी से पीएमओ को भी अवगत करवाया था। वहीं फेस न्यूज पर पीआईबी की मान्यता निलंबित करने से लेकर रद्द करने तक का मानक बनाया था। पीएमओ ने 24 घंटे के भीतर ही उनका फैसला पलट दिया था। इसके साथ ही चुनाव से पहले बड़ी संख्या में भारतीय सूचना सेवा के अफसरों के तबादले से इस कैडर में नाराजगी थी। शिकायतें पीएमओ तक पहुंची। कुछ मीडिया संस्थान भी इस फैसले से खफा थे।