इस राज्य में बड़ी मुश्किल में फंस रही है भाजपा सरकार, 855 लोगों की शहादत से जुड़ा है मामला

Daily news network Posted: 2018-05-11 15:06:29 IST Updated: 2018-05-11 15:06:29 IST
इस राज्य में बड़ी मुश्किल में फंस रही है भाजपा सरकार, 855 लोगों की शहादत से जुड़ा है मामला

गुवाहाटी।

नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 का मुद्दा राज्यभर में तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत फिर से वही पुराना राग अलापते हुए इस विधेयक को खिलंजिया विरोधी व अवैध घुसपैठियों का समर्थन करने वाला करार दिया। 




उनका कहना है कि पहले भी हम इस विधेयक का विरोध कर चुके हैं तथा आगे भी इसका विरोध करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गत 7 मई को हमने जेपीसी के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल से मिलकर इस विधेयक के विरोध में 8 पेज का एक पत्र सौंपा था। पूर्व मुख्यमंत्री महंत ने इस विधेयक पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोरनाड संगमा की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को भी इस विषय पर अहम कदम उठाना चाहिए। उनका कहना है कि असम आंदोलन में 855 लोग शहीद हुए थे, जिसके बाद असम समझौता हुआ। इस कारण इस समझौते का अक्षरश: पालन होना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि केंद्र सरकार हमेशा से ही अन्य राज्यों की अपेक्षा असम के साथ भेदभाव करती है। महंत ने कहा कि असम संग्रामी मंच की ओर से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी को इस विषय से अवगत कराया जा चुका है। 





उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बांग्लादेश से आए हिंदू अत्याचार की दुहाई देकर असम में बसना चाहते हैं, लेकिन हमारा स्पष्ट मत है कि 24 मार्च 1971 के बाद किसी देश से आने वाले किसी भी मजहब के लोगों को असम में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उनका यह भी कहना है कि सालों पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार भी इस विधेयक को लाना चाहती थी। उस समय मैं असम गण परिषद का अध्यक्ष था। इस नाते इस विधेयक का पुरजोर विरोध भी किया था। वहीं अगप के दो वरिष्ठ नेता वीरेंद्र वैश्य व कुमार दीपक दास ने संसद में इस विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए फाड़ दिया था। अगर यह विधेयक पारित होता है तो असम में बांग्लादेशियों का बोझ और अधिक बढ़ जाएगा।