आसान नहीं होगी हिंदुओं की घर वापसी, भाजपा के इस राज्य में हो रहा जमकर बवाल

Daily news network Posted: 2018-04-20 12:33:50 IST Updated: 2018-04-20 13:16:13 IST
आसान नहीं होगी हिंदुओं की घर वापसी, भाजपा के इस राज्य में हो रहा जमकर बवाल
  • मंच ने एक बयान जारी कर महासभा को शीघ्र ही राज्यवासियों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने को लेकर चेताया।

गुवाहाटी।

पिछले दिनों नई दिल्ली में नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर संयुक्त संददीय समिति के साथ हुई बैठक में असम सत्र महासभा के इस विधेयक के कथित समर्थन को लेकर नागरिकता कानून संशोधन विरोधी मंच ने कड़ी आलोचना की है। 




मंच ने एक बयान जारी कर महासभा को शीघ्र ही राज्यवासियों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने को लेकर चेताया। साथ ही कहा कि अगर महासभा इस मुद्दे पर चुप रहता है तो उसे असम विरोधी संगठन मान लिया जाएगा। मंच ने आसू सहित राज्य के 17 जनगोष्ठीय संगठनों द्वारा इस विधेयक के खिलाफ समिति के समक्ष दिखाई स्थिति के लिए इन संगठनों की भूमिका की है। 





मालूम हो कि नई दिल्ली में 17 अप्रैल को संयुक्त संसदीय समिति के साथ हुई बैठक में भाग लेकर विधेयक के खिलाफ राज्य के 17 जनगोष्ठी संगठनों ने नाराजगी जताई थी। नागरिकता कानून संशोधन विरोधी मंच ने इन जनगोष्ठीय संगठनों का अभिनंदन किया। साथ ही असम सत्र महासभा द्वारा कथित तौर पर विधेयक का समर्थन किए जाने को लेकर मंच महासभा से नाराज है। मंच का कहना है कि अगर संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष असम सत्र महासभा द्वारा विधेयक के समर्थन में बयान देने की मीडिया में आई खबरें सच साबित होती हैं तो महासभा को इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। 




नागरिकता कानून संसोधन विरोधी मंच ने कहा है कि संयुक्त संससदीय समिति की सुनवाई में भाग लेने के बाद असम के कुल 16 जनगोष्ठीय संगठनों ने नई दिल्ली में पत्रकार सम्मेलन का आयोजन कर एक स्वर में उक्त विधेयक को रद्द करने तथा किसी कीमत पर असम समझौते के आधार पर साल 1971 की 24 मार्च की आधी रात तक की समय सीमा को खारिज कर धर्म आधार पर असम में विदेशी नागरिकों को शरण देने की कथित साजशि को सफल होने नहीं दिए जाने संबंधी  घोषणा का मंच ने स्वागत किया है। बयान में मंच ने कहा कि 855 शहीदों के बलिदान को किसी भी कीमत पर जाया नहीं किया जा सकता है।