अब अरुणाचल सीमा पर अपनी हेकड़ी नहीं दिखा पाएगा चीन, रेलवे ने दी योजना को मंजूरी

Daily news network Posted: 2018-03-11 20:26:06 IST Updated: 2018-03-11 20:26:06 IST
अब अरुणाचल सीमा पर अपनी हेकड़ी नहीं दिखा पाएगा चीन, रेलवे ने दी योजना को मंजूरी
  • भारतीय रेल चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा पर अपनी मजबूती बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अपात स्थिती में सेना को सीमा पर पहुंचाने के लिए और अहम हथियारों एवं सैनिकों को ले जा रही विशेष ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

भारतीय रेल चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा पर अपनी मजबूती बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अपात स्थिती में सेना को सीमा पर पहुंचाने के लिए और अहम हथियारों एवं सैनिकों को ले जा रही विशेष ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।


भारतीय रेलवे सेना की इन जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी ओर से पैसा खर्च करने को भी तैयार है।


सूत्रों ने कहा कि रेलवे थलसेना मुख्यालय के उस प्रस्ताव पर भी सहमत हो गया है जिसमें अरुणाचल प्रदेश में भारत- चीन सीमा के पास के विभिन्न सेक्टरों तक हथियारों को तेजी से ले जाने के लिए पूर्वोत्तर में कई प्रमुख स्टेशनों पर सर्मिपत सुविधाएं मुहैया कराने की बात कही गई थी।


अरुणाचल प्रदेश के भलुकपुंग, असम के शिलापत्थर और मकुम और नगालैंड के मोकोकचुंग और दीमापुर में ये सुविधाएं शुरू की जाएंगी।


रेलवे ने अपने अधिकारियों को पूर्वोत्तर और पाकिस्तानी सीमा से सटे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण विभिन्न इलाकों में भेजने पर भी सहमति जताई है ताकि वे थलसेना की विशिष्ट आधारभूत संरचना से जुड़ी जरूरतों को समझ सकें।


पिछले साल डोकलाम में 73 दिनों तक कायम रहे गतिरोध के बाद थलसेना ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में परिवहन आधारभूत संरचना दुरुस्त करने की जोरदार वकालत की थी ताकि सैनिकों और हथियारों को चीन से लगी सीमा वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे संवेदनशील जगहों तक ले जाने में लगने वाले समय में कटौती हो।


टैंकों, तोपों, इंफैंट्री लड़ाकू वाहनों और मिसाइलों सहित अन्य साजोसामान ले जाने के लिए थलसेना करीब 750 ट्रेनों का इस्तेमाल करती है और इसकी एवज में रेलवे को हर साल करीब 2,000 करोड़ रुपए का भुगतान करती है।


इन फैसलों से वाकिफ थलसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि युद्ध के लिए( सैनिकों और हथियारों) को ले जाने में थलसेना के लिए रेलवे का नेटवर्क सबसे निर्णायक है। उन्होंने कहा कि थलसेना विभिन्न वस्तुओं और हथियारों के परिवहन के लिए करीब 5,000 कोचों का इस्तेमाल करती है और उन्हें रखने के लिए नई पार्किंग सुविधाएं तैयार की जा रही हैं।