ट्यूनीशिया में भव्य स्वागत से भाव-विभोर हुए किरेन रिजिजू, कह दी एेसा बात

Daily news network Posted: 2018-05-12 16:55:11 IST Updated: 2018-05-12 18:15:28 IST
ट्यूनीशिया में भव्य स्वागत से भाव-विभोर हुए किरेन रिजिजू, कह दी एेसा बात
  • केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तर अफ्रीकी देश का आधिकारिक दौरा करके वापस आ चुके हैं। मंगलवार से शुरू अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान रिजिजू ने ट्यूनीशिया का दौरा भी किया।

नर्इ दिल्ली।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तर अफ्रीकी देश का आधिकारिक दौरा करके वापस आ चुके हैं। मंगलवार से शुरू अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान रिजिजू ने ट्यूनीशिया का दौरा भी किया। जहां उन्होंने वहां के शीर्ष नेताआें से मुलाकात की। सोशल मीडिया पर सक्रिय रिजिजू ने अपने दौरे की जानकारी लगातार अपडेट की। इसके साथ ही वे वहां की तस्वीरें भी ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट की।

 


रिजिजू ट्यूनीशिया के राज्यपाल के आथित्य से इतना खुश हुए कि ट्वीट करके अपनी खुश जाहिर की। उन्हाेंने ट्वीट करके लिखा कि मुझे यह देखकर खुशी हुर्इ कि यहां की राज्यपाल भारत के लिए इतने उच्च विचार रखती हैं आैर उसे सम्मान की नजरों से देखती हैं। इसके साथ ही रिजिजू ने वहां के जमा-अल-काबिर मस्जिद का दौरा किया। जहां के इमाम ने उन्हें कुरान गिफ्ट की।

बता दें कि इससे पहले रिजिजू ने ट्यूनीशिया के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को भारत का पुराना दोस्त बताया। बता दें कि 80 के दशक में भारत में ट्यूनीशिया के राज्यपाल की नियुक्ति हुई थी। इससे पहले ट्यूनीशिया पहुंचे पर रिजिजू का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया।



गौरतलब है कि रिजिजू ने हाल ही में लीबिया पहुंचे थे। जहां उन्होंने दो दिन तक विभिन्न नेताओं के साथ मुलाकात की थी। बता दें कि वर्ष 2011 में मुअम्मर कज्जाफी सरकार के गिरने के बाद लीबिया के भारत के साथ संबंध टूट गए थे। नर्इ दिल्ली का बीते कुछ वर्ष से त्रिपोली में कोई प्रतिनिधि नहीं हैं और ना ही लीबिया का कोई राजदूत नर्इ दिल्ली में है।


दौरे से पहले रिजिजू ने कहा कि गृहयुद्ध और कज्जाफी के लंबे शासन के खत्म होने के बाद पहली बार भारत लीबिया की सरकार से संपर्क स्थापित करेगा। अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान, रिजिजू के लीबिया के शीर्ष नेतृत्व तथा संकटग्रस्त भारतीय मूल के सदस्यों से भी मिले।  करीब 1500 ऐसे भारतीय नागरिक हैं, जिन्होंने विदेश मंत्रालय के लीबिया छोडऩे के परामर्श के बावजूद वहां रूककर अपनी नौकरी जारी रखी।

रिजिजू ने कहा कि ऐसे देशों से जिनके भारत से अब तक उचित संबंध नहीं हैं, उनके साथ राजनायिक संबंध बनाना विदेश मंत्रालय की पहल का हिस्सा है। मंत्री के साथ ट्यूनीशिया में भारत के राजदूत प्रशांत पिसे भी थे, जो लीबिया का अतिरिक्त प्रभार संभाले हुए हैं। भारत ने 1969 में लीबिया में पहली बार राजनयिक मिशन स्थापित किया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1984 में लीबिया की यात्रा की थी।