अरुणाचल: या तो रेप का आरोप साबित नहीं होगा, अगर हो गया तो सालों लग जाएंगे सजा देने में

Daily news network Posted: 2018-04-23 16:04:06 IST Updated: 2018-04-24 11:52:03 IST
अरुणाचल: या तो रेप का आरोप साबित नहीं होगा, अगर हो गया तो सालों लग जाएंगे सजा देने में
  • रेप केस में दोष सिद्धि की पिछले दशकों की तुलना में अब घटकर सिर्फ 25 फीसदी के आसपास ही रह गई है।

ईटानगर

पिछले कुछ साल में सरकारों ने रेप के मामलों में कानून तो लगातार सख्त किया है,, लेकिन देश में ऐसे मामलों में जांच और ट्रायल की लचर प्रक्रिया की वजह से बहुत कम ही मामलों में गुनहगार सलाखों के पीछे पहुंच पाते हैं। ऐसे केस में दोष सिद्धि की पिछले दशकों की तुलना में अब घटकर सिर्फ  25 फीसदी के आसपास ही रह गई है। वहीं पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश की बात करें तो यहां महज 10 फीसदी केस में आरोप साबित हो पाते हैं। खास बात यह है कि अरुणाचल उन चार राज्यों में शामिल हैं, जहां 12 साल तक की बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों को फांसी देने का प्रावधान है। हालांकि मिजोरम और नागालैंड का स्थिति काफी अच्छी है। मिजोरम में 82.4 प्रतिशत, तो वहीं नागालैंड में 72.1 फीसदी आरोपी सलाखों के पीछे होते हैं। 




अरुणाचल में 2117 तक करना होगा यौन शोषण के शिकार बच्चों को न्याय के लिए इंतजार

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों के यौन शोषण पर एक रिपोर्ट जारी कर  कहा था कि भारत में जितने बाल दुष्कर्म के मामले दर्ज है, उन्हें निपटाने दशकों लग जाएंगे। इस रिपोर्ट में बताया कि देश में यौन शोषण के शिकार बच्चों के साल 2016 तक लंबित मामले को निपटाने में ही अभी 99 साल लग जाएंगे। सत्यार्थी के मुताबिक अगर 2016 तक पोस्को एक्ट के तहत दर्ज मामलों के निपटारे की बात करें तो देश के कई राज्यों में पीडि़तों को कई सालों तक न्याय का इंतजार करना होगा। कैलाश सत्यार्थी ने चिन्ड्रन कैन नॉट वेट रिपोर्ट जारी कर बाल यौन शोषण के लंबित मामलों की सुनवाई पर चिंता जताई। इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर 2016 तक के मामलों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में बच्चों के यौन शोषण के मामले का निपटारा करने में 99 साल लग जाएंगे। वहीं यूपी, राजस्थान में यौन शोषण के शिकार बच्चों को न्याय के लिए 2026 तक इंतजार करना पड़ेगा। वहीं गुजरात में उन्हें 2071 और अरुणाचल में 2117 तक न्याय मिल पायेगा।  इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में बाल यौन शोषण के शिकार बच्चों को न्याय के लिए 2029 तक इंतजार करना पड़ेगा। 2016 में भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो के तहत बच्चों से जुड़े अपराध के 1,06,958 मामले दर्ज हुए।   



2012: रेप के मामलों में राज्यों में दोष सिद्धि की दर में पिछला अरुणाचल

2012 में हुए दुष्कर्म और आरोप साबित करने के मामले में अरुणाचल प्रदेश के आंकड़े बेहद खराब है। यहां 2012 में महज 10 फीसदी मामलों में आरोपी पर दोष साबित हुए हैं। वहीं पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की बात की जाए तो मिजोरम में 82. 4 फीसदी, नागालैंड में 72.1 फीसदी, सिक्किम में 50 फीसदी, मेघालय में 46.7 फीसदी और त्रिपुरा में 14.7 फीसदी मामलों में आरोप साबित हुए हैं। वहीं अन्य राज्यों की बात करें तो यूपी में 50.3 फीसदी, उत्तराखंड में 63 फीसदी, जम्मू-कश्मीर 7.5 फीसदी, गोवा   में 8.3 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 10.9 फीसदी, आंध्र प्रदेश 11.2 फीसदी, तमिलनाडु में 20.1 फीसदी, ओडिशा में 21.3 फीसदी मामलों में आरोप साबित हुए हैं। 



आरोप साबित करने के आंकड़ों में गिरावट

बता दें कि देश में रेप के मामलों में जांच और ट्रायल की लचर प्रक्रिया की वजह से बहुत कम ही मामलों में गुनहगार सलाखों के पीछे पहुंच पाते हैं। ऐसे केस में दोष सिद्धि की पिछले दशकों की तुलना में अब घटकर सिर्फ  25 फीसदी के आसपास ही रह गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो 1973 में 44.3 फीसदी, 1983 में 37.7 फीसदी, 2009 में 26.9 फीसदी, 2001 में 40. 8 फीसदी, 2010 में 26.6 फीसदी, 2011 में 26.4 फीसदी, 2012 में 24.4 फीसदी, 2013 में 27.1 फीसदी और 2016 में महज 25.5 फीसदी मामलों में आरोप साबित हुए हैं। 




अरुणाचल प्रदेश में नाबालिग से दरिंदगी करने वालों को होगी फांसी

इस बीच अरुणाचल सरकार ने 12 साल से कम उम्र की नाबालिग से बलात्कार करने वालों को अब फांसी देने का प्रावधान किया है। इस विधेयक को पास करने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354(बी) और 354(डी) में संशोधन किया गया, जिसमें पहले 7 से 10 वर्ष तक की कठोर सजा और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान था। इसके अलावाए संशोधन विधेयक धारा 376एए और धारा 376डीए को संशोधन कर 12 साल से कम उम्र की महिलाओं से दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के लिए भी मौत की सजा दी जाएगी। विधेयक में पोस्कोए भारतीय साक्ष्य अधिनियम और संवैधानिक संहिता कानून में भी संशोधन किया गया है।