CPI (M) के दोबारा महासचिव चुने गए येचुरी ने मोदी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

Daily news network Posted: 2018-04-23 12:37:22 IST Updated: 2018-04-23 12:37:22 IST
CPI (M) के दोबारा महासचिव चुने गए येचुरी ने मोदी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सीताराम येचुरी को दूसरे कार्यकाल के लिए एक बार फिर पार्टी का महासचिव चुन लिया है

हैदराबाद।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सीताराम येचुरी को दूसरे कार्यकाल के लिए एक बार फिर पार्टी का महासचिव चुन लिया है। येचुरी को दोबारा महासचिव बनाये जाने का फैसला पार्टी के 22वें कांग्रेस सम्मेलन के आखिरी दिन लिया गया। यह सम्मेलन पांच दिनों से चल रहा है। नवनिर्वाचित केंद्रीय कमेटी की पहली बैठक में चेयुरी, प्रकाश करात, बिमन बसु, बृंदा करात, माणिक सरकार, पिनारायी विजनयस सुभाषिणी अली तथा बीवी रागावुलू समेत 17 लोगों को पोलित ब्यूरो के लिए चुना गया। इससे पहले 20 नये सदस्यों के साथ केंद्रीय समिति के 95 सदस्य चुने गये। समित में 17 महिलाओं को स्थान मिला है। उत्तराखंड राज्य समिति के सचिव राजिन्द्र नेगी तथा छत्तीसगढ राज्य समिति के सचिव संजय पराटे को स्थायी आगंतुक बनाया गया है। 




माकपा की नवनिर्वाचित 95 सदस्यीय केंद्रीय कमेटी ने महासचिव पद पर दूसरी बार 65 साल के येचुरी के निर्वाचन को मंजूरी दी है। येचुरी ने 2015 में विशाखापत्तनम में हुई 21 वीं पार्टी कांग्रेस में महासचिव के पद पर प्रकाश करात की जगह ली थी। कांग्रेस से समापन सत्र को संबोधित करते हुए येचुरी ने कहा कि हमारी कांग्रेस असरकारी रही, विस्तृत चर्चा हुई और हमने इस कांग्रेस में अहम फैसले लिए। हमारे नेताओं-कार्यकर्ताओं एवं हमारे शत्रु वर्ग में यदि कोई संदेश जाना चाहिए तो वह यह है कि माकपा एकजुट पार्टी के तौर पर उभर रही है। बीते 18 अप्रैल से शुरु हुई पार्टी कांग्रेस में येचुरी के उत्तराधिकारी के लिए कई नामों पर चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों ने बताया कि त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार, पोलित ब्यूरो सदस्य बंृदा करात और सचिव बीवी राघवुलु संभावित दावेदारों में शामिल थे। 



आंध्र प्रदेश के रहने वाले येचुरी उदारवादी सोच वाले नेता माने जाते हैं और अर्थशास्त्र तथा गठजोड़ की राजनीति के माहिर हैं। सीतराम येचुरी इससे पहले पार्टी के अंदरूनी फोरम पर पार्टी की कुछ नीतियों पर सवाल भी लगातार उठाते रहे हैं। येचुरी ने कई बार कहा है कि हमें पार्टी संगठन को मजबूत करना होगा ताकि देश की पार्टी के सामने की चुनौतियों का सामना कर सकें। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पूंजीवाद में संकट गहरा गया है और समाजवाद के संघर्ष को मजबूत किए बिना लोगों के लिए कोई निजात नहीं है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद भारतीय इतिहास को दोबारा लिखने के प्रयास हो रहे हैं। सांप्रदायिकता फैल रही है और लोकतांत्रिक परंपराएं कमजोर हो रही हैं। इसी का सामना करना हमारे लिए चुनौती है।



येचुरी का अब तक का सफर

चेन्नई में जन्मे येचुरी का बचपन हैदराबाद में बीता है। साल 1974 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और स्टूडेंट फेडेरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य बने। 1975 में वो सीपीआईएम के साथ जुड़े गए थे। आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए अनेक नेताओं में उनका भी नाम शामिल है। 1984 में येचुरी पार्टी की केंद्रीय कमेटी में चुन लिए गए। इसके बाद पार्टी के 14वें अधिवेशन में वो पार्टी के पोलित ब्युरो के सदस्य चुने गए। विशाखापत्तनम में 2015 में हुए पार्टी के 21वें अधिवेशन में येचुरी को निर्विरोध पार्टी का पांचवां महासचिव चुना गया था।