हिंदू बांग्लादेशी नागरिक विवाद में सोनोवाल-शाह की बैठक

Daily news network Posted: 2018-04-20 17:50:51 IST Updated: 2018-04-20 18:30:20 IST
हिंदू बांग्लादेशी नागरिक विवाद में सोनोवाल-शाह की बैठक
  • जेपीसी की बैठक में असम के अधिकतर संगठनों द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किए जाने के बाद आनन फानन में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को दिल्ली तलब किया गया है, जहां वे शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार और जेपीसी को लेकर अहम चर्चा ह

नई दिल्ली।

जेपीसी की बैठक में असम के अधिकतर संगठनों द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किए जाने के बाद आनन फानन में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को दिल्ली तलब किया गया है, जहां वे शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार और जेपीसी को लेकर अहम चर्चा होने वाली है।


 

गुरुवार शाम को दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए जेपीसी बैठक को लेकर राज्य में चल रही अफवाहों को दरकिनार करते हुए कहा कि जब तक जेपीसी की बैठक चल रही है लोगों को कुछ भी अटकलें नहीं लगानी चाहिए।


बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने के मामले पर उन्होंने कहा कि यह एक लोकतांत्रिक मामला है और इसे लोकतांत्रिक तरीके से चलने दें। इसमें किसी भी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए।


जेपीसी बैठक को लेकर अभी तक चुप्पी साधे सोनोवाल ने कहा कि हम जेपीसी का समर्थन करते हैं। फिलहाल अभी बैठक चल रही है। वार्ता की प्रक्रिया चल रही है उसे पूरा होने दें। वहीं उन्होंने जेपीसी के असम दौरे पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि असम में उनका स्वागत है। सोनोवाल ने कहा कि उन्होंने जेपीसी को असम आने का निमंत्रण दिया है। वे आएं और लोगों से वार्ता करें।


अमित शाह से होने वाली बैठक के बारे में उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष के साथ मामले पर चर्चा होगी। हालांकि सूत्र के मुताबिक संघ के बढ़ते दबाव के बीच अमित शाह ने सोनोवाल को दिल्ली तलब किया है। भाजपा मुख्यालय के एक अधिकारिक सूत्र की मानें तो जेपीसी की बैठक औकर साथ ही असम में हिंदू बांग्लादेशी नागरिकता का विरोध किए जाने के कारण संघ भाजपा पर दबाव बना रहा है।


जिसकी वजह से मुख्यमंत्री को तलब किया गया है और नागरिकता संशोधन मामले में विरोधी संगठनों या राजनीतिक दलों को मनाने की बात कह सकते हैं ताकि आने वाले चुनाव पर इसका असर ना पड़े।