कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शमिल हुए सुदीप देब बर्मन के हाथ लगा मंत्री पद

Daily news network Posted: 2018-03-10 16:09:31 IST Updated: 2018-03-10 16:12:37 IST
कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शमिल हुए सुदीप देब बर्मन के हाथ लगा मंत्री पद
  • साल 2018 के साथ त्रिपुरा में बीजेपी का के सूरज का उदय हो गया और 3 मार्च को भाजपा की ऐतिहासिक जीत के साथ वामपंथी शासन का अंत हो गया है

अगरतला

साल 2018 के साथ त्रिपुरा में बीजेपी का के सूरज का उदय हो गया और 3 मार्च को भाजपा की ऐतिहासिक जीत के साथ वामपंथी शासन का अंत हो गया है, कल (शुक्रवार) को राज्य के पदेशाध्यक्ष बिप्लब कुमार देव ने मुख्यमंत्री पद ली आैर जिष्णु कुमार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।


इसी के साथ नौ आैर विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ले ली है। जिसमें कोंग्रस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए सुदीप रॉय बर्मन पर सबकी निगाहे लगी हुई थी, लेकिन उन्हें बीजेपी ने खली हाथ नहीं छोड़ा बल्कि उन्हें त्रिपुरा सरकार में मंत्री पद मिल गया है।



सुदीप रॉय बर्मन बीजेपी में शामिल होने से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं। वह त्रिपुरा विधानसभा के त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी और त्रिपुरा प्रदेश युवा कांग्रेस समिति के पूर्व अध्यक्ष भी थे और यहीं नहीं वह त्रिपुरा विधान सभा में विपक्ष के नेता रहे थे।



सुदीप रॉय बर्मन ने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से सीपीएम ने कृष्ण मजूमदार के खिलाफ चुनाव लड़ा था और 7382 वोटों से जीत हासिल की थी। आपको बता दें कि बर्मन 1998 से अगरतला सीट पर अपनी पैठ जमाए हुए हैं, उन्होंने इस बार भी यह सीट बहुत बड़े अंतर से जीती हैं।



इससे पहले सुदीप इंडियन नेशनल कांग्रेस में थे जिसके बाद वह कांग्रेस को छोड़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और 2017 तृणमूल को छोड़ भाजपा में शामिल हो गए और 3 मार्च को अगरतला से जीत हासिल कर त्रिपुरा में बीजेपी के मंत्री पद हासिल किया है लेकिन इससे पहले भी सुदीप रॉय बर्मन ने 1998 , 2003 , 2008 और 2013 में सीपीएम को इस सीट से करारी हार का स्वाद चखाया था।




आपको बता दें कि भाजपा में शामिल हुए सुदीप रॉय बर्मन INC से 1998  में सीपीएम के नेता कृष्णा रक्षित दत्ता को 2062 के भरी मतों से हराया। इसके बाद 2003 सीपीएम से बर्मन के खिलाफ मैदान में उतरे संकर दास को उन्होंने 2610 वोटों से हराया इसी तरह 2008 और 2013 बिकास रॉय और संकर प्रशाद दत्ता को उन्होंने 1825 व 2762 वोटों से करारी मात दी थी।