त्रिपुरा में सत्ता बदलते ही एक नई लड़ाई शुरू, पुराने लोगों में बेचैनी

Daily news network Posted: 2018-04-19 17:42:04 IST Updated: 2018-04-19 19:01:59 IST
त्रिपुरा में सत्ता बदलते ही एक नई लड़ाई शुरू, पुराने लोगों में बेचैनी
  • त्रिपुरा में सत्ता बदलते ही एक नए तरह की लड़ाई शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सहयोगी संगठनों में जिस तरह अचानक से कार्यकर्ता और नेताओं की संख्या बढ़ी है...

अगरतला।

त्रिपुरा में सत्ता बदलते ही एक नए तरह की लड़ाई शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सहयोगी संगठनों में जिस तरह अचानक से कार्यकर्ता और नेताओं की संख्या बढ़ी है, उससे पहले से संघ में काम कर रहे लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इस कारण संगठन के भीतर शिकायतों का दौर भी शुरू हो गया है।


रातों रात बदले झंडे

भाजपा के नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि रातों रात प्रदेश से लाल झंडा उतार कर भगवा फहरा दिया था। इसके साथ ही बीजेपी के त्रिपुरा प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि त्रिपुरा में जैसे बीजेपी जीती तो कैबिनेट गठन से पहले ही माफिया त्रिपुरा छोड़कर भाग गए।



त्रिपुरा के सिंडिकेड सत्तारूढ़ दल में हुए शामिल

देवधर ने कहा कि जो भी सिंडिकेट त्रिपुरा में काम कर रहे थे वह सत्ता बदलने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ आना शुरू हुए। देवधर के मुताबिक इसमें बीजेपी का कोई दोष नहीं है बल्कि माकपा ने वहां इसी तरह की संस्कृति बनाई है। देवधर ने माना कि त्रिपुरा में लोगों ने रातोंरात लाल झंडे हटाकर भारतीय मजदूर संघ के झंडे लगा लिए।


मजदूर यूनियन सीटू के कारण लोग असुरक्षित


सूत्रों के मुताबिक सीपीएम के मजदूर यूनियन सीटू कार्यकर्ताओं के संघ से जुड़े संगठन भारतीय मजदूर संघ में शामिल होने से वे लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं जो इसमें पहले से हैं। भारतीय मजदूर संघ के एक नेता ने कहा कि हमारे संगठन में पहले से जुड़े जितने लोग थे उन से 3 गुना ज्यादा लोग सीटू से भारतीय मजदूर संघ में आ गए हैं। उन्हें कोई औपचारिक तरीके से संगठन में शामिल नहीं कराया गया बल्कि रातोंरात उन्होंने लाल झंडे हटाकर भारतीय मजदूर संघ के झंडे लगा दिए और खुद को भारतीय मजदूर संघ का बताने लगे। वे अपनी मनमर्जी चलाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे संगठन में पहले से जुड़े लोग नाराज हैं।


संघ सूत्रों के मुताबिक सीपीएम के यूथ विंग डीवाईएफआई के लोग भी सत्ता बदलने के बाद बड़ी संख्या में एबीवीपी में शामिल हुए हैं। हालांकि संघ के एक सीनियर नेता के मुताबिक इस पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि हम संगठन में पहले से शामिल लोगों की अनदेखी नहीं होने देंगे और उनकी भावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा।

त्रिपुरा में नहीं बढ़ी हैं संघ की शाखाएं

उन्होंने कहा कि भले ही लाल की जगह लोगों ने भगवा झंडा लगा लिया है और संघ से जुड़े संगठनों में आने की होड़ मची है लेकिन संघ की शाखाओं में ये लोग नहीं पहुंच रहे हैं। अभी भी शाखाओं की संख्या उतनी ही है जितनी चुनाव से पहले थी। बीजेपी नेता सुनील देवधर ने बताया कि त्रिपुरा बीजेपी में फिलहाल हम नए सदस्य नहीं बना रहे हैं। इस पर छह महीने की रोक लगा दी थी। हम जो भी नए सदस्य बनाएंगे उनकी पृष्ठभूमि जांची जाएगी।