कांग्रेस के बागी उम्मीदवार पर मेहरबान हुई बिप्लब सरकार, 3 मंत्रालय का दिया प्रभार

Daily news network Posted: 2018-03-11 12:07:26 IST Updated: 2018-03-11 12:45:15 IST
कांग्रेस के बागी उम्मीदवार पर मेहरबान हुई बिप्लब सरकार, 3 मंत्रालय का दिया प्रभार
  • त्रिपुरा की बिप्लब सरकार ने कांग्रेस के बागी नेता प्राणजीत सिंह रॉय को अपने मंत्रिमंडल में जगह देते हुए कृषि, परिवहन एवं पर्यटन विभागों का प्रभार दिया गया

अगरतला।

त्रिपुरा की बिप्लब सरकार ने कांग्रेस के बागी नेता प्राणजीत सिंह रॉय को अपने मंत्रिमंडल में जगह देते हुए कृषि, परिवहन एवं पर्यटन विभागों का प्रभार दिया गया है। बता दें कि 2013 के चुनाव में प्राणजीत सिंह रॉय ने कांग्रेस के टिकट पर राधाकिशोरपुर सीट को जीता था। हालांकि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के लेफ्ट को साथ देने से नाराज प्राणजीत सिंह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे, लेकिन पिछले साल अगस्त में इन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और राधाकिशोरपुर सीट पर कमल खिलाया। इन्होंने आरएसपी के नेता श्रीकांत दत्ता को हराया।


बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में रॉय ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। 2013 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दें तो इस सीट पर रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी का ही दबदबा था। आरएसपी ने सात बार इस सीट से चुनाव जीता था। वहीं आरएसपी के टिकट से जॉय गोबिंदो रॉय लगातार तीन बार (1998-2008) विधानसभा चुनाव जीता था। वहीं प्राणजीत ने पिछले विधासभा चुनाव में जॉय गोबिंदो रॉय को 837 वोटों से हराया था। रॉय को 20,140 वोट मिले, जबकि जॉय के खाते में 19303 वोट आए थे।



बता दें कि राधाकिशोर विधानसभा से सबसे कम वोट से चुनाव जीतने वाले नेता रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के जॉय गोबिंदा रॉय ही हैं। 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार धीरेंद्र कुमार सेन ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। जॉय ये चुनाव महज 187 वोटों से ही जीत पाए थे। जॉय के खाते में 10288 वोट तो धीरेंद्र को 10101 वोट मिले थे। इस सीट पर जॉय गोबिंदा रॉय का दबदबा रहा है। उन्होंने 1998 से 2008 के बीच लगातार तीन चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई थी। 1967 के चुनाव में कांग्रेस के एनके सरकार ने सबसे ज्यादा मतों से जीत दर्ज की थी। उन्होंने सीपीआई के एसके दास को रिकॉर्ड 7761 वोटों से हराया था। सरकार को 10878 तो दास को मह 3117 वोट मिले थे।



1972 के चुनाव में कांग्रेस ने एनके सरकार की जगह उषा राजन सेन को चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन इस बार उनकी टक्कर सीपीएम के सुशील मुखर्जी से थी। सेन ने मुखर्जी को 1379 वोटों से हराया। सेन को 4888 तो मुखर्जी को 3509 वोट मिले थे। हालांकि 1977 में कांग्रेस की हैट्रिक के रास्ते में आरएसपी ने रोड़े अटका दिए। आरएसपी के जोगेश चक्रोबती ने पिछले बार से विजेता उषा राजन सेन को 3723 मतों से करारी शिकस्त दी। जोगेश को 5478 तो सेन के खाते में महज 1755 वोट ही आए। 1977 के बाद से ये विधानसभी क्षेत्र आरएसपी का गढ़ बन गया। यहां से आरएससी ने रिकॉर्ड सात बार जीत दर्ज की।



1983 के चुनावों में कांग्रेस से सेन की जगह भानू गोपाल को चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन जोगेश के आगे उनकी एक ना चली। जोगेश को 7070 वोट मिले। वहीं भानू को 6590 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। 1988 में आरएसपी ने जोगेश की जगह चित्ता रंजन शाहा को टिकट दिया, उधर कांग्रेस भी अपने दूसरे उम्मीदवार रणजीत सिंह रॉय को लेकर सामने आई, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। शाहा के खाते में 8604 तो रणजीत को 7971 वोट मिले। 1993 के चुनावों में भी आरएसपी ने इस सीट को 4376 वोटों से जीता लिया। आरएसपी के पन्ना लाल घोष को 9949 तो इस बार निर्दलीय चुनाव लड़े रणजीति सिंह रॉय को 5573 वोट मिले।



अगले विधानसभा चुनावों में आरएसपी ने एक बार फिर अपने उम्मीदवार को बदल दिया, लेकिन इस बार भी ये सीट आरएसपी के ही खाते में गई। आरएसपी के जॉय गोबिंदो देब रॉय को 10288 तो कांग्रेस के धीरेंद्र कुमार सेन को 10101 वोट मिले। इस जीत के बाद अगले दो विधानसभा चुनावों में जॉय गोबिंदो देब ने ही बाजी मारी। 2003 में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार प्राणजीत सिंह रॉय को 884 वोटों से हराया। 2008 के चुनावों में भी ये सीट जॉय गोबिंदो के ही खाते में गई। जॉय को 14448, तो प्राणजीत सिंह रॉय को 14015 वोट मिले। हालांकि लगातार दो चुनावों में मिली हार के बाद भी प्राणजीत सिंह हताश नहीं हुए और 2013 के चुनावों में उनकी मेहनत रंग आई। इस चुनाव में उन्होंने अपने सबसे बड़े प्रतिद्ंवदी जॉय गोबिंदो रॉय को 837 वोटों से हराया। प्राणजीत सिंह को 20140 तो वहीं रॉय को 19303 वोट मिले।