8 महीने समुद्र से लड़कर हिंदुस्तान लौट रही हैं बेटियां, इस तरह होगा मणिपुर का नाम रोशन

Daily news network Posted: 2018-05-14 14:56:19 IST Updated: 2018-05-14 14:56:19 IST
8 महीने समुद्र से लड़कर हिंदुस्तान लौट रही हैं बेटियां, इस तरह होगा मणिपुर का नाम रोशन

समुद्र के रास्ते दुनिया की सैर पर निकलीं हिंदुस्तानी बेटियां 16 मई को गोवा पहुंच रही है। भारतीय नौसेना की इस टीम में कुल 6 महिला अधिकारी हैं। ये टीम 8 महीनों में दुनिया का चक्कर लगा लौटने वाली यह टीम एशिया की पहली ऑल विमिन टीम है, जो समुद्र के रास्ते दुनिया मापने (सरकम नेविगेशन) निकली है। पिछले साल 10 सितंबर को आईएनएसवी तारिणी पर नाविका सागर परिक्रमा के नाम से गोवा से शुरु हुआ यह सफर गोवा में ही आकर पूरा होगा।



इस अभियान का नेतृत्व कर रही लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने बताया कि हम हर वक्त काफी सतर्क रहते हैं। समंदर कभी लापरवाही को माफ नहीं करता और अगर सचेत नहीं हैं तो जान पर बन सकती हैं। सफर के दौरान एक बार हमारा सामना भयानक तूफान से हुआ और एक बहुत बड़ी लहर बोट को क्रैश करती हुई मेरे ऊपर से गुजरी। अगर लाइफ जैकेट पहनने और तैयारी को लेकर जरा भी लापरवाही हुई होती तो लहर इतनी तेज थी कि वह हम सबको और बोट को बहा ले जाती। 




वर्तिका कहती हैं कि इससे मेरा भरोसा मजबूत हुआ कि डर और चौकसी के बीच बहुत बारीक लाइन होती है और यह भी कि समंदर को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या ने कहा कि इस सफर का सबसे बड़ा सबक यह है कि चौकसी में कभी कोई कमी नहीं आनी चाहिए क्योंकि कभी भी कहीं भी ऐसा हो सकता है, जो आपने सोचा ही ना हो।  लेफ्टिनेंट स्वाति ने कहा कि किसी भारतीय महिला का अकेले सरकम नेविगेशन करना अगला बड़ा कदम हो सकता है, जिसे हम भविष्य में देखने की उम्मीद करते हैं। 



लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल ने कहा कि इस अभियान के लिए हमें फिजिकली और मेंटली ट्रेंड किया गया था। हम किताबें, मूवी, म्यूजिक साथ लेकर आए हैं। पर इन आठ महीने में कई बार लगा कि हमारे आपस में बात करने के लिए टॉपिक ही खत्म हो गए है। घर से आना वाला एक फोन कॉल जहां आंसू ले आता था, वहीं खुशी की बहार भी। 





कौन-कौन है टीम में शामिल

लें. कमांडर वर्तिका जोशी: उत्तराखंड की वर्तिका ब्राजील से दक्षिण अफ्रीका की समुद्री यात्रा कर चुकी हैं।

लें. कमांडर प्रतिभा जामवाल: प्रतिभा का कहना है कि जब वे नेवी का इंटरव्यू देने जा रही थीं, तो उनकी मां ने शॉपिंग के लिए पैसे देते हुए कहा था कि चयन न हो तो रोना मत।

ले. ऐश्वर्या बोडापट्टी: ऐश्वर्या पायलट बनना चाहती थीं, लेकिन जब उन्होंने नेवी की यूनिफॉर्म देखी तो नौसेना में जाने की ठानी।

ले, विजया देवी: वे मणिपुर से हैं, कहती हैं कि पिताजी सीआईएसएफ में थे, उन्हीं से प्रेरित होकर नेवी ज्वाइंन की।

लें. पी. स्वाति: स्वाति कहती हैं कि उन्हें उनके परिवार का पूरा साथ मिला।

लें. पायल गुप्ता: देरहादून की पायल पासिंग आउट परेड देखकर सेना में जाने की ठानी।