पूर्वोत्तर के इन खिलाडिय़ों के दम पर भारत ने कॉमनवैल्थ गेम्स में रचा इतिहास

Daily news network Posted: 2018-04-15 14:14:50 IST Updated: 2018-04-16 13:38:50 IST
  • भारत ने अपने खिलाडिय़ों के शानदार और दमदार खेल की बदौलत 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य सहित कुल 66 पदक जीतकर गोल्ड कोस्ट में 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में अपने इतिहास का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

नई दिल्ली।

भारत ने अपने खिलाडिय़ों के शानदार और दमदार खेल की बदौलत 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य सहित कुल 66 पदक जीतकर गोल्ड कोस्ट में 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में अपने इतिहास का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने इन 66 पदकों के साथ राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में 500 पदक भी पूरे कर लिये और यह उपलब्धि हासिल करने वाला वह पांचवां देश बन गया। भारत मेजबान आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाद तीसरे स्थान पर रहा। 




आस्ट्रेलिया ने 80 स्वर्ण सहित 198 पदक जीते, जबकि इंग्लैंड ने 45 स्वर्ण सहित 136 पदक जीते। कनाडा 15 स्वर्ण सहित 82 पदक जीतकर चौथे और न्यूजीलैंड 15 स्वर्ण सहित 46 पदक जीतकर पांचवें नंबर पर रहा। भारत ने 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों की 15 स्वर्ण सहित 64 की कुल पदक संख्या को कहीं पीछे छोड़ दिया। भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अपनी मेजबानी में 2010 दिल्ली में दूसरा स्थान रहा था, जहां उसने 38 स्वर्ण सहित कुल 101 पदक जीते थे। भारत ने 2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में 30 स्वर्ण सहित 69 पदक जीते थे और उस समय वह चौथे स्थान पर रहा था। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के अब कुल 504 पदक हो गये हैं, जिनमें 181 स्वर्ण, 175 रजत और 148 कांस्य पदक शामिल हैं। भारत ने खेलों के अंतिम दिन रविवार को सात पदक जीतकर अपने पदकों की ओवरऑल संख्या को 66 पहुंचा दिया।


मैरी कॉम का जलवा

बता दें कि राष्ट्रमंडल खेलों में पूर्वोत्तर के खिलाडिय़ों का भी जलवा दिखा। मणिपुर की दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम ने महिलाओं की 45-48 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इस दिग्गज मुक्केबाज ने फाइनल में इंग्लैंड की क्रिस्टिना ओ हारा को 5-0 से मात देकर पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में पदक हासिल किया था। लंदन ओलिंपिक 2012 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली मैरी कॉम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बन गई हैं। मैरी कॉम ने पहले राउंड में सब्र दिखाया और मौकों का इंतजार किया। उन्हें मौके भी मिले, जिसे उन्होंने अपने पंचों से बखूबी भुनाया। मैरी कॉम अपने बाएं जैब का अच्छा इस्तेमाल किया। मैरी कॉम धीरे-धीरे आक्रामक हो गई और क्रिस्टिना उनके आगे नहीं टिक पाईं।




मीराबाई चानू बनाया रिकॉर्ड

वल्र्ड चैंपियन मीराबाई चानू ने 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया था। चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार उठाकर भारत को शानदार जीत दिलाई थी। मीराबाई चानू ने स्नैच में 86 किलोग्राम भार उठाकर कॉमनवेल्थ में नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने पहले प्रयास में 80 किलोग्राम का वेट उठाया जो कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड है। इसके बाद 84 किलोग्राम भार उठाया। उसके बाद उन्होंने 86 किलोग्राम भार उठाकर अपना 85 किलो का रिकॉर्ड तोड़ दिया। तो वहीं क्लीन ऐंड जर्क के पहले प्रयास में उन्होंने 103 किलोग्राम भार उठाया और दूसरे प्रयास में 107 किलोग्राम का भार उठाया और तीसरे प्रयास में 110 किलोग्राम भार उठाया।


संजीता चानू का धमाका

भारत की स्टार वेटलिफ्टर संजीता चानू ने 53 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने कुल 192 किलोग्राम (स्नैच में 84 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 108 किग्रा) वजन उठाया। बता दें कि संजीता ने लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल जीता है। इससे पहले उन्होंने 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ में 48 किग्रा कैटेगरी में यह पदक अपने नाम किया था। इस मुकाबले में पापुआ न्यू गिनी की लोआ टौआ ने सिल्वर और कनाडा की राचेल बैजिनेट ने ब्रॉन्ज जीता था।



ये खिलाड़ी जीत तो नहीं सके, लेकिन सबका दिल जीत लिया

वहीं असम के नगांव जिले की रहने वाली हीमा दास ने 400 मीटर स्पर्धा के फाइनल में पहुंचकर सबको चौंका दिया था। हालांकि हीमा दास पदक तो नहीं जीत पाई, लेकिन उन्होंने सभी का दिल जीत लिया। फाइनल में हीमा दास 51.32 सेकेंड का समय निकालते हुए छठे स्थान पर रहीं। वहीं मणिपुर की मुक्केबाज सरिता देवी भी कमाल नहीं दिखा पाईं। सरिता मुक्केबाजी में महिलाओं की 60 किलोग्राम स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में हारी और इस कारण वह पदक से भी चूक गईं। भारतीय मुक्केबाज सरिता को क्वार्टर फाइनल में आस्ट्रेलिया की एंजा स्ट्रिड्समैन ने एकतरफा मुकाबले में 5-0 से मात दी थी। इस हार के कारण सरिता भारत के लिए पदक जीतने में नाकाम रहीं।


वहीं राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुए भारोत्तोलन की बात की जाए तो यहां भी मणिपुर की खिलाड़ी लालचानहीमी ने निराश किया। महिलाओं की 90 किलोवर्ग की स्पर्धा में उन्हें आठवां स्थान प्राप्त हुआ था। उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क में कुल 194 किलोग्राम का भार उठाया, जो अन्य प्रतिस्पर्धियों की तुलना में उठाया गया सबसे कम भार था। स्नैच में लालचानहीमी ने पहली बारी में 85 किलो का भार उठाया और यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, क्योंकि दूसरी और तीसरी बारी में वह 89 किलो का भार उठाने में असफल रहीं।


वहीं पूर्वोत्तर की खिलाड़ी लवलिना बोरगोहेन ने महिला मुक्केबाजी में निराश किया। वे 69 किलोग्राम भारवर्ग के क्वार्टर फाइनल में हार कर बाहर हो गईं थी। लवलिना को इंग्लैंड की सैंडी रयान ने ओक्सेनफोर्ड स्टूडियोज में खेले गए मुकाबले में 3-2 से मात दी थी। पहले राउंड की शुरुआत में लवलिना हावी रहीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पकड़ छोड़ दी। रयान ने रक्षात्मक तरीका अपनाया और लवलिना के पंचों को अपने शरीर से दूर रखा। दूसरे राउंड में लवलिना बैकफुट पर रहीं और आक्रामक से रक्षात्मक अंदाज में दिखीं। वहीं रयान ने उन्हें बैकफुट पर रखा और अच्छे जैब और हुक का इस्तेमाल किया। तीसरे राउंड में दोनों आक्रामक दिखीं, लेकिन कुल मिलाकर रयान भारतीय खिलाड़ी पर हावी रहीं।