मणिपुर के चमकते सितारों में एक हैं बाला देवी, दस साल की उम्र में जोड़ा था फुटबॉल से नाता

Daily news network Posted: 2018-04-19 18:18:07 IST Updated: 2018-04-20 16:42:35 IST
मणिपुर के चमकते सितारों में एक हैं बाला देवी, दस साल की उम्र में जोड़ा था फुटबॉल से नाता
  • देश के पूर्वोत्तर हिस्सा भले ही छोटा हो इसकी शान और बुलंदियां काम नहीं है यहां की मिट्टी ने देश को कई खिलाडी दिए हैं,

इंफाल

देश के पूर्वोत्तर हिस्सा भले ही छोटा हो इसकी शान और बुलंदियां काम नहीं है यहां की मिट्टी ने देश को कई खिलाडी दिए हैं, फिर चाहे वो मुक्केबाज मैरी कॉम हो या सरिता देवी चानू या संजीता चानू जिन्होंने ओलिंपिक में गोल्ड जीत कर भारत का नाम रोशन किया है


नार्थईस्ट ने देश को कई ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जो पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं यूं तो फुटबॉल जैसे खेल में अब से पहले लड़कियों की नुमाइंदगी कम ही दिखाई देती थी, लेकिन अब तेजी से लड़कियां इस खेल में आ रही हैं क्योंकि इसमें न केवल नाम व शोहरत मिल रही है, बल्कि करियर बनाने के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं नांगोम बाला देवी इस समय देश की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की कप्तान हैं।



मणिपुर के छोटे से गांव की रहने वाली हैं बाला


नांगोम बाला देवी का जन्म 2 फरवरी 1990 में मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में हुआ जब वह दस साल की थीं तो मणिपुर के एक स्थानीय क्लब में उन्होंने लड़कों को फुटबॉल खेलते देखा। उस समय कोई लड़की फुटबॉल नहीं खेल रही थी। तभी उन्हें लगा कि वह भी इनकी तरह क्यों न फुटबॉल खेलें। फिर क्या था उन्होंने क्लब बनाया और अपनी टीम बनाई।

नहीं मानी हार

नांगोम बाला देवी बताती हैं कि, पहले उन्हें कुछ पता नहीं था। जब लड़कों के साथ फुटबॉल खेलने जाती तो कुछ लड़के बोलते कि लड़की को नहीं खिलाएंगे और कुछ कहते कि ये अच्छा खेलती है इसको खिलाएंगे। उनके साथ लड़- लड़कर खेलते हुए मैं आगे बढ़ी। एक साल में ही मेरा अंडर-19 में सेलेक्शन हो गया। इसके बाद में स्टेट टीम में आ गई। जब यह टीम जीती, तब मेरी उम्र कम थी। 2014 से नेशनल टीम की कैप्टन हूं।


करियर की शुरुआत

बाला देवी के करियर की शुरुआत 2002 में असम में आयोजित हुए अंडर -19 महिला चैम्पियनशिप में उन्होंने मणिपुर की अंडर -19 टीम भाग लिया। इस प्रतियोगिता में बाला देवी दे सबसे ज्यादा गोल किये जिसके बाद उन्हें इस टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया। लेकिन बाला यहीं नहीं रुकी उन्हें साल 2003 में भी एक बार फिर से सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरूस्कार मिला। इसके साथ ही बाला देवी को 17 साल की उम्र में सबसे ज्यादा गोल करने का अवार्ड भी मिला है।


आखिरकार 2014 में वो पल आ ही गया जब देवी को सीनियर टीम में भारतीय महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में मणिपुर का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और इस साल भी उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया इस गेम में मणिपुर ने ओडिशा को 3-1 से हराया था। इसके साथ ही साल 2015 के राष्ट्रीय खेलों के दौरान, देवी ने मणिपुर का प्रतिनिधित्व किया और एक बार फिर राज्य को गोल्ड मेडल जिताया।