मिलिए मणिपुर की गोल्डन गर्ल से, जिन्होंने मुक्केबाजी में बढ़ाया देश का मान

Daily news network Posted: 2018-04-14 16:38:29 IST Updated: 2018-04-16 10:51:50 IST
  • मैरी कॉम ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के 10वें दिन शनिवार को महिला मुक्केबाजी की 45-48 किलोग्राम भारवर्ग के स्पर्धा का स्वर्ण अपने नाम कर लिया है।

मैरी कॉम ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के 10वें दिन शनिवार को महिला मुक्केबाजी की 45-48 किलोग्राम भारवर्ग के स्पर्धा का स्वर्ण अपने नाम कर लिया है। इस दिग्गज मुक्केबाज ने फाइनल में इंग्लैंड की क्रिस्टिना ओ हारा को 5.0 से मात देकर पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में पदक हासिल किया। लंदन ओलिंपिक 2012 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली मैरी कॉम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बन गई हैं। आपको बता दें कि मैरीकॉम मणिपुर की रहने वाली हैं। हालांकि मैरी कॉम का यहां तक का सफर इतना आसान नहीं रहा। इस खबर में हम आपको बताएं कि कैसे एक छोटे से गांव की लड़की आज गोल्डन गर्ल बन चुकी है।



मैरी कॉम ने सपने और हौसले को मरने नहीं दिया

मैरी कॉम का जन्म मणिपुर के छोटे से स्थान कांगथेई में बहुत गरीब परिवार में हुआ था। दूरदराज इलाके और गरीबी का दंश झेलने वाली मैरी कॉम का हौसला छोटा नहीं है। मैरीकॉम ने अपनी भूख को मारा, इच्छाओं को मारा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपने और हौंसले को मरने नहीं दिया। मैरीकॉम में कभी हिम्मत न हारने की भावना भरी हुई है। वो हारती है और फिर उठ जाती हैं और दोगुनी मेहनत के साथ वापसी करती हैं। मैरी कॉम का जज्बा हमेशा देश के लिए मेडल लाने की चाहत रखता है। यही वजह है कि मैरीकॉम की सफलताओं को देखते हुए उन्हें तमाम सुवधिाएं और नौकरियां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, लेकिन उनका लक्ष्य खेलना होता है।



खेल के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय

वह भारत के लिए छह बार वल्र्ड चैंपियन और 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। इसके अलावा एशियन वूमेंस बॉक्सिंग चैंपियनशिप, एशियन गेम्सए एशियन इंडोर गेम्स आदि में शानदार प्रदर्शन किया है। मैरी कॉम आजकल खेल के अलावा राजनीति में भी सक्रिय हैं। वह भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा सांसद हैं, जबकि पिछले दिनों उन्होंने इम्फाल में मैरी कॉम रीजनल बाक्सिंग फाउंडेशन अकेडमी खोली है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।


ऐसी है मैरी कॉम की एकेडमी

मणिपुर के पश्चिमी इम्फाल जिले में स्थित मैरी कॉम की ये मुक्केबाजी अकेडमी 3.3 एकड़ में फैली है, जो कि राजधानी से 10 किलोमीटर दूर है। श्मैरी कॉम रीजनल बाक्सिंग फाउंडेशन के लिए मणिपुर सरकार ने 2013 में यह जमीन आवंटित की थी, जबकि अकेडमी की स्थापना राष्ट्रीय खेल विकास कोष से मिली राशि से हुई है। यह पूर्वोत्तर में पहली आधुनिक अकेडमी है, इसमें 20 लड़कियों समेत 45 युवा मुक्केबाज प्रशिक्षण ले रहे हैं। बता दें कि इस दिग्गज महिला मुक्केबाज पर मैरी कॉम नाम से बॉलीवुड फिल्म भी बन चुकी है। प्रियंका चोपड़ा स्टारर यह फिल्म बॉलीवुड की सफल फिल्मों में शुमार है।


खुद को इस तरह रखती हैं फिट

मैरी कॉम सुबह और शाम को मिलाकर कुल 8 घंटे वर्कआउट करती हैं। इसमें रोज सुबह के समय 14 किलो मीटर रनिंग के साथ शुरुआत करती हैं। इसके बाद स्ट्रेचिंग, फ्लोर एक्सरसाइज और स्कीपिंग को शामिल करती हैं। प्रेक्टिस के दौरान शैडो बॉक्सिंग, पंचिंग और स्पीड बैग का भी यूज करती हैं। दोपहर में जिम में पुशअप्स और सिटअप्स करने के बाद सुबह से की गई सारी एक्सरसाइज को दोहराती हैं। शाम के समय हल्की रनिंग और स्ट्रेचिंग करती हैं।

सरकार ने दिया अर्जुन पुरस्कार

मुक्केबाजी में देश को गौरवान्वित करने वाली मैरी को भारत सरकार ने वर्ष 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, लेकिन मैरीकॉम सामान्य जीवन जीती हैं। 2012 के ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक, इंडोर एशियन खेलों और एशियन मुक्केबाजी में स्वर्ण, इन्चिओन, दक्षिण कोरिया एशियन खेलों में स्वर्ण, 2001 में प्रथम बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप की विजेता सहित 10 से अधिक राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी मैरीकॉम अपनी सफलता को खुद पर हावी नहीं होने देती हैं। 


तीन बच्चों की मां हैं मैरी कॉम

मैरी कॉम तीन बच्चों की मां हैं और खुद बताती हैं कि कई बार सभी चीजों को एक साथ लेकर चलना मुश्किल होता है। इसके बावजूद वह अब तक इसमें सफल रही हैं। गौरतलब है कि साल 2012 में लंदन में हुए ओलंपिक में वह क्वॉलीफाई करने वाली एकमात्र भारतीय बॉक्सर रहीं और ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। यही नहीं 2014 में दक्षिण कोरिया में इंचियोन में हुए एशियन गेम्स में मैरी कॉम ने गोल्ड मेडल जीता और ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला रहीं। 




बता दें कि मैरी कॉम को बचपन में टीवी पर मोहम्मद अली को मुक्केबाजी करते देख बॉक्सर बनने की प्रेरणा मिली। परिवार ने शुरू में विरोध किया। इसके बावजूद ने मैरी कॉम ने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू की और इसके कुछ महीनों बाद ही 2000 में राज्य स्तरीय चैम्पियनशिप जीता। मैरी कॉम कई बार इसका जिक्र कर चुकी हैं कि जब उन्होंने बॉक्सिंग शुरू की तो कई लोग उनका मजाक बनाते थे। मैरी कॉम की जन्म एक मार्च 1983 को हुआ था।