CWG: समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक होंगी मैरी कॉम

Daily news network Posted: 2018-04-15 15:19:43 IST Updated: 2018-04-15 20:24:00 IST
  • ऑस्ट्रेलिया में 21वें कॉमनवेल्थ खेलों के समापन समारोह में भारत की दिग्गज मुक्केबाज एम. सी. मैरीकॉम रविवार को यहां होने वाले समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक होंगी।

गोल्ड कोस्ट।

ऑस्ट्रेलिया में 21वें कॉमनवेल्थ खेलों के समापन समारोह में भारत की दिग्गज मुक्केबाज एम. सी. मैरीकॉम रविवार को यहां होने वाले समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक होंगी।


मैरीकॉम ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण करते हुए स्वर्ण पदक जीता है। पैंतीस साल की मैरीकॉम पांच बार मुक्केबाजी में विश्व चैंपियन रह चुकीं हैं। मैरीकॉम ने शनिवार को लाइट फ्लाइवेट (48 किग्रा) के फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की क्रिस्टीना ओहारा को हराकर गोल्ड खिताब जीता। इससे पहले मैरीकॉम ओलंपिक में भी मेडल जीत चुकी हैं।



ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मैरीकॉम ने मीडिया से इस बारे में बात करते हुए कहा कि, 'मैं पहली बार इस तरह की प्रतियोगिता में भारत की ध्वज वाहक बनूंगी। मुझे नहीं पता कि मैं इसकी हकदार हूं या नहीं लेकिन निश्चित तौर पर मुझे इस पर गर्व है।'


एशियाई चैंपियन रह चुकी मैरीकॉम ने पिछले पांच महीने में तीन स्वर्ण पदक जीते हैं। अपने नाम को गलत तरीके से लिखने के मामले पर बात करते हुए मैरीकॉम ने कहा, 'असल में मेरे पासपोर्ट पर जो नाम लिखा है, आयोजकों ने उसका इस्तेमाल किया। खेलों के खत्म होने और भारत लौटने के बाद मैं इसे सही कराऊंगी।'


बता दें कि मेरीकॉम के गोल्ड मेडल जीतने पर कई नामचीन हस्तियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने ट्विटर पर बधाई संदेश देते हुए कहा कि 'अनस्टोपेबल', मैरी का गोल्ड मेडल हर समय सफल होने के लिए उनके समर्पण और प्रतिबद्धता को दिखाता है। सचिन ने लिखा कि बधाई और याद रखो तुम भारत का गौरव हो।


बता दें कि भारत ने 66 पदकों के साथ बहुत ही शानदार अंदाज में अपने शानदार अभियान का समापन किया। यह कुल मिलाकर भारत का खेलों के इतिहास में तीसरा सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। करोड़ों हिंदुस्तानी खेलप्रेमियों की नजरें आखिरी दिन इस बात पर लगी थीं कि क्या भारत साल 2014 में ग्लास्गो के प्रदर्शन को पीछे छोड़ पाएगा या नहीं और भारतीय दल ने रविवार सुबह इन उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए ग्लास्गो के 64 पदकों को पीछे छोड़ते हुए 66 पदक जीत कर इतिहास रच दिया।