कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाली मीराबाई बनना चहती थी तीरंदाज

Daily news network Posted: 2018-04-23 15:40:14 IST Updated: 2018-04-23 17:48:15 IST
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाली मीराबाई बनना चहती थी तीरंदाज
  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाली वेटलिफ्टर सिखोम मीराबाई चानू एक तीरंदाज बनना चाहती थी, लेकिन अपने कोच से मिलने के बाद

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाली वेटलिफ्टर सिखोम मीराबाई चानू एक तीरंदाज बनना चाहती थी, लेकिन अपने कोच से मिलने के बाद विश्व चैम्पियन और राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता के करियर की राह बदल गई।

चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किग्रा कैटेगरी में कुल 196 किग्रा (स्नैच में 86 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 110 किग्रा) वजन उठाया। इस दौरान उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क में अपना ही दो बार रिकॉर्ड तोड़ा।


कोच ने बदली भविष्य की राह


मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 20 किमी दूर नोंगपोक काकचिंग गांव के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली मीराबाई ने शुरू में ही तय कर लिया था कि वह खिलाड़ी बनेगी। कोच की तलाश में वह 2008 में इम्फाल के खुमान लाम्पाक पहुंची और उसके बाद मुडक़र नहीं देखा।


तीरंदाज बनने का था शौक


उन्होंने कहा कि मेरे सारे भाई और कजिन फुटबॉल खेलते हैं, लेकिन दिन भर खेलने के बाद मैले कुचैले होकर घर आते थे। मैं ऐसे खेल को चुनना चाहती थी, जिसमें साफ सुथरी रहूं। पहले मैं तीरंदाज बनना चाहती थी जो साफ सुथरे और स्टाइलिश रहते हैं। मीराबाई ने कहा कि वे खड़े खड़े निशाना साधते हैं। एक दिन मैं और मेरा कजिन खुमान लाम्पाक के साइ सेंटर गए, लेकिन मैं किसी तीरंदाज से नहीं मिल सकी।


कुंजरानी देवी से मिली प्रेरणा


मीराबाई चानू  बताती हैं कि, मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुंजरानी देवी की उपलब्धियों की झलक देखी और भारोत्तोलन अपनाने के बारे में सोचा। कुछ दिन बाद मैं और मेरा कजिन भारोत्तोलन प्रशिक्षण केंद्र गए और मेरी मुलाकात अनिता चानू से हुई, जिन्होंने मुझे इस खेल में पदार्पण के लिए कहा।


उन्होंने कहा कि मैं रोज सुबह छह बजे सेंटर पहुंचती थी और 22 किमी का सफर तय करने के लिए दो बस बदलनी पड़ती थी। शुरूआत में कठिन था, लेकिन बाद में कोई परेशानी नहीं हुई।


एक वक्त अच्छी डाइट के लिए भी नहीं थे पैस

सिखोम मीराबाई चानू मणिपुर के इंफाल ईस्ट की रहने वाली हैं। बेहतरीन खेल के लिए उन्हें कुछ दिन पहले पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। चानू ने जब वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग शुरू की थी, तब उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इस वजह से उन्हें कई बार अच्छी डाइट नहीं मिल पाती थी। चानू ने 31 अगस्त, 2015 में रेलवे ज्वाइन की। वह सीनियर टिकट कलेक्टर के पद पर हैं।


एशियाई खेलों पर है नजर

राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्ड बनाने के बाद अब मीराबाई की नजरें एशियाई खेलों में 200 किलो वजन उठाने पर है। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों के सभी शीर्ष प्रतिद्वंद्वी ओलंपिक में होंगे। एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने पर मैं ओलंपिक में भी जीत सकती हूं, लेकिन इसके लिए 196 किलो से ज्यादा वजन उठाना होगा। मेरा लक्ष्य 200 किलो है।