बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अभिनय कर चुके असम के 'आदिल हुसैन', 'बिग बी' बनने का था सपना

Daily news network Posted: 2018-04-14 18:37:15 IST Updated: 2018-04-14 19:44:23 IST
बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अभिनय कर चुके असम के 'आदिल हुसैन', 'बिग बी' बनने का था सपना
  • 2012 की ऑस्कर विजेता व सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल लाइफ ऑफ पाई जैसे फिल्मों मे काम कर चुके असम के गोलपाड़ा के ऐक्टर आदिल हुसैन ने थिएटर में भी मुकाम हासिल किया है।

गुवाहाटी।

2012 की ऑस्कर विजेता व सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल लाइफ ऑफ पाई जैसे फिल्मों मे काम कर चुके असम के गोलपाड़ा के ऐक्टर आदिल हुसैन ने थिएटर में भी मुकाम हासिल किया है। उनके नाटक ऑथेलो अ प्ले इन ब्लैक ऐंड व्हाइट को 1999 में एडिनबरा फेस्टिवल में स्कॉट्समैन अवार्ड मिल चुका है। उनकी अभिनय यात्रा पांच साल की उम्र में ही शुरू हो गई थी, जब उन्होंने अपने पड़ोस में कुछ कॉमेडियंस के कार्यक्रम देखने के बाद घर में आकर स्टैंड-अप शो किया।




अमिताभ बनने का था ख्वाब

माता-पिता के सात बच्चों में सबसे छोटे आदिल हर शुक्रवार को स्कूल से गायब रहते थे, 85 पैसे चुराकर कोई फिल्म देखते थे और अमिताभ बच्चन बनने का ख्वाब देखते थे। यह सब नापसंद करने वाले अपने शिक्षक-पिता के जोर देने पर उन्होंने गुवाहाटी के बी. बरुआ कॉलेज से दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। उनके पिता उन्हें अंग्रेजी का प्रोफेसर बनाना चाहते थे, लेकिन इसकी जगह उन्होंने टीवी, असमिया फिल्मों, नुक्कड़ नाटकों और रेडियो नाटकों में अभिनय किया।


एनएसडी में एडमिशन सपने जैसा


ट्रेनिंग की जरूरत महसूस करते हुए उन्होंने एनएसडी में एडमिशन के लिए अर्जी डाल दी और 27 वर्ष की उम्र में उन्हें इसमें एडमिशन भी मिल गया। उन्हें 650 रु. महीने की स्कॉलरशिप मिलती थी जिसमें से 500 रु. ट्यूशन फीस में चले जाते थे। लेकिन आर्थिक दिक्कतें उनके लिए सबसे कम चिंता का विषय रहीं। एनएसडी का गहन कोर्स उनके लिए सपने जैसा था। वो असम से थे तो उनकी हिंदी कमजोर थी। जिसके लिए उन्हाेंने बहुत मेहनत की। दिन-रात मेहनत करते थे आैर महज दो घंटे सोते थे। इस वजह से उनका तेरह किग्रा वजन कम हो गया था आैर वे बहुत दुबले हो गए थे। आदिल ने बताया कि कभी एेसा समय भी था जब मेरे पास पैसे नहीं होते थे।


दो रु. में खाते थे खाना


अपने संघर्ष वाले दिन में अपनी तकलीफों को हंस के टाल दिया। आदिल कभी भी अपने मुश्किल दौर की चर्चा किसी से नहीं करते है, यहां तक की अपने दोस्तो से भी नहीं। आदिल बहुत आत्मसम्मान वाले व्यक्ति है। उनकी जिंदगी में एक एेसा समय भी आया था जब दोस्त के साथ किराए पर लिए गए अपार्टमेंट में बड़ा सा ताला लगा दिया गया था आैर उन्हें घर में आने के लिए खिड़की का इस्तेमाल करना पड़ता था। क्योंकि उनके पास किराया देने के लिए पैसे नहीं थे। महज दो रु में वे खाना खाते थे आैर खाना खाने के लिए वे सात किमी पैदल रेलवे स्टेशन जाते थे।



असम के मोबाइल ‘हेंगुल थिएटर’ से जुड़े


एनएसडी के बाद उन्हें ब्रिटेन के ड्रामा स्टुडियो लंदन में पढऩे के लिए स्कॉलरशिप मिल गई। कोर्स वैसा नहीं था, जैसा वे चाहते थे। इसलिए 1994 में भारत लौट आए और असम के मोबाइल ‘हेंगुल थिएटर’ से जुड़ गए। आदिल तीन साल तक इस थिएटर से जुड़े रहे। इससे उन्हें कुछ पैसे मिल जाते थे।


असमिया फिल्म में किया अभिनय

प्रवीन हाजारिका के निर्देशन में बनी असमिया फिल्म 'स्प्रिंगखल'में काम किया। ये फिल्म असमिया उपन्यासकार और निर्देशक दिवंगत भवेंद्रनाथ सैकिया की कहानी पर आधारित है। इसके बाद असमिया लेखक अतुलानंद गोस्वामी की पुरस्कृत लघुकथा पर आधारित हिंदी फिल्म द रोग एलीफेंट बनाने की भी योजना है।



17 साल की उम्र में दिया अपना पहला ऑटोग्राफ


बता दें कि  17 साल की उम्र में स्टैंड-अप कॉमेडियन के रूप में अपना पहला ऑटोग्राफ दे चुके आदिल का कहना है कि वे जनता से बहुत तारीफ की चाह नहीं रखते।  वे अब भी पैदल चलकर एनएसडी के पास ही भगवान चाय वाले की दुकान पर जाते हैं और वहां बैठे लोगों से गपशप करते हैं। वे आज भी नहीं बदलें है।