क्या है मां त्रिपुरा सुंदरी की महिमा, जिन्हें BJP दे रही है त्रिपुरा में जीत का श्रेय

Daily news network Posted: 2018-03-11 15:23:12 IST Updated: 2018-03-11 17:02:27 IST
क्या है मां त्रिपुरा सुंदरी की महिमा, जिन्हें BJP दे रही है त्रिपुरा में जीत का श्रेय
  • इस बार के चुनाव और उसके परिणामों में मां त्रिपुरा सुंदरी के मंदिर की खूब चर्चा हो रही है, क्योंकि त्रिपुरा में 25 साल बाद जमानत जब्त पार्टी रही

अगरतला

इस बार के चुनाव और उसके परिणामों में मां त्रिपुरा सुंदरी के मंदिर की खूब चर्चा हो रही है, क्योंकि त्रिपुरा में 25 साल बाद जमानत जब्त पार्टी रही बीजेपी ने सत्ता पलट कर दी है और इस जीत का श्रेय भाजपा ने मां त्रिपुरा सुंदरी को दिया है।


भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत नवनिर्वाचित बिप्लब देब, सुनील देवधर समेत कई बड़े नेताओं ने माता के दर्शन किए हैं और उनका आशीर्वाद लेकर ही बिप्लब देब ने त्रिपुरा में बीजेपी के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। ऐसे में त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के बारें में चर्चा होना तो आम है ही, लेकिन बता दें कि मां का मंदिर शक्तिपीठों में से एक हैं जहां जो भी मांगों वो जरूर मिलता है। शायद उसी का परिणाम है की बीजेपी को त्रिपुरा में जीत हासिल हुई। जानिए क्या है मां त्रिपुरा सुंदरी की पौराणिक कथा और क्या है उनकी महिमा।



त्रिपुरा राज्य का नाम माता त्रिपुरा सुंदरी के नाम पर पड़ा है। अगरतला शहर से 55 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे नंबर 44 पर उदयपुर नामक एक कस्बा है जहां त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर स्थित है। गोमती नदी के तट पर स्थित उदयपुर कभी त्रिपुरा के राजतंत्र की राजधानी हुआ करता था। उदयपुर से पांच किलोमीटर आगे है माताबाड़ी। त्रिपुरा के लोग इस मंदिर को माताबाड़ी कहते हैं। माताबाड़ी यानी मां का घर।


यह देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इसे कूर्म पीठ कहा गया है। मंदिर का वास्तु भी कछुए की पीठ की तरह का है। यहां सती के बाएं पांव का अंगूठा गिरा था। ये मंदिर 11वीं सदी का बना हुआ बताया जाता है।



मां त्रिपुरा सुंदरी के मंदिर का गर्भ गृह 1501 में महाराजा ध्यान माणिक्य ने बनवाया था। मंदिर का परिसर बड़ा ही साफ सुथरा, मनोरम और सुंदर है। यहां सालों भर हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वहीं मंदिर परिसर में दीवाली पर बहुत बड़ा मेला लगता है। इसके साथ ही मंदिर में बलि प्रथा अभी भी जारी है सालों भर रोज यहां बकरा और भैंसे आदि की बलि चढ़ाई जाती है। यह देश के उन कुछ दर्जन मंदिरों में शामिल है जहां अभी बलि की प्रथा बंद नहीं कराई जा सकी है।


अब तक त्रिपुर सुंदरी मंदिर की पूरी व्यवस्था माकपा सरकार देखती थी। वामपंथी सरकार इस मंदिर के लिए हर महीने एक निश्चित राशि साफ सफाई और व्यवस्था के लिए जारी करती है। दरअसल इस मंदिर को राज्य सरकार अपने राज्य का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मंदिर मानती है।


इसलिए इसके सौंदर्यीकरण और इंतजामात पर सरकार की खास नजर रहती है। हमें मंदिर परिसर की सफाई व्यवस्था उत्तम कोटि की नजर आती है। त्रिपुरा सुन्दरी शक्तिपीठ हिन्दू धर्म के पावन 51 शक्तिपीठों में से एक है, इन शक्तिपीठों का धार्मिक दृष्टि से बड़ा ही महत्त्व है। ये अत्यंत पवित्र तीर्थस्थान कहलाते हैं।